गोरखपुर। हिन्दी पत्रकारिता दिवस (30 मई) के अवसर पर हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति द्वारा डिजिटल जागरूकता एवं विमर्श की एक विशेष श्रृंखला आयोजित की जा रही। इस श्रृंखला के अंतर्गत प्रत्येक शनिवार को विभिन्न समसामयिक विषयों पर संगोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य पत्रकारों को बदलते दौर की चुनौतियों के प्रति सजग करना है। कार्यक्रमों की शुरुआत 2 मई को नारद जयंती के अवसर पर हुई थी, जबकि इसी क्रम में शनिवार को शंकुल भवन सभागार में दूसरा सत्र आयोजित किया गया। समिति के अनुसार अगला कार्यक्रम 16 मई को आयोजित किया जाएगा।
शनिवार को आयोजित संगोष्ठी का विषय “डिजिटल पत्रकारिता और साइबर सुरक्षा” रहा, जिसमें विशेषज्ञों, वरिष्ठ पत्रकारों और साइबर एक्सपर्ट्स ने विस्तार से अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में बिना सत्यापन के खबरें प्रसारित कर सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
वक्ता उपेंद्र पाण्डेय ने कहा कि आज सूचना देने की होड़ में कई बार उसकी सत्यता प्रभावित हो जाती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पत्रकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी खबर से किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। सोशल मीडिया की विश्वसनीयता को परखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।
मुख्य वक्ता बी.डी. मिश्रा ने कहा कि “खबर चरित्रवान होनी चाहिए, चरित्रहीन नहीं।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई उदाहरणों का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल साक्ष्य आज न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में पत्रकारों को और अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।
साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह ने साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि अनजान लिंक, फर्जी कॉल, संदिग्ध एप्लीकेशन और अननोन फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आजकल ठग लोगों की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर उन्हें निशाना बना रहे हैं।
प्रशांत त्रिपाठी (आईसीए) ने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को डराकर या लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती और पुलिस वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी नहीं करती। आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों का उपयोग करते समय सावधानी बरतने की सलाह भी दी।
मान्यता प्राप्त समिति अध्यक्ष अरविंद राय ने कहा कि पत्रकारिता में मार्गदर्शन की कमी महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि खबर लिखने से पहले उसके प्रभाव के बारे में जरूर सोचना चाहिए और नाबालिगों की पहचान उजागर करने से बचना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन मृत्युंजय शंकर सिंहा एवं गजेंद्र त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर सतीश शुक्ला, गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, मंत्री पंकज श्रीवास्तव, जेपी गुप्ता, मनोज यादव, सतीश वत्स, गजेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
डिजिटल युग में पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सत्यापन और जिम्मेदारी बेहद आवश्यक है।












