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बस्ती में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ई-रिक्शा का पंजीयन प्रमाण-पत्र (आरसी) समय पर उपलब्ध न कराने के मामले में प्लास्टिक कॉम्प्लेक्स स्थित मेसर्स होरा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी पर 95 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है और आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को वाहन का पंजीयन प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह फैसला सोमवार को सुनाया गया। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने यह निर्णय गौर थाना क्षेत्र के बुढ़ऊवा गांव निवासी राधेश्याम की ओर से दायर परिवाद पर सुनाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने 7 मई 2023 को महिंद्रा एंड महिंद्रा से वित्तीय सहायता लेकर आजीविका चलाने के उद्देश्य से ई-रिक्शा खरीदा था। रसीद और आरसी न मिलने का लगाया आरोप राधेश्याम का आरोप था कि वाहन खरीदते समय उन्हें 11 अप्रैल 2023 की तिथि का चालान तो दिया गया, लेकिन ई-रिक्शा की कीमत की रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। साथ ही पंजीयन शुल्क के नाम पर 5 हजार रुपये लेने के बावजूद लंबे समय तक वाहन की आरसी नहीं दी गई। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा। डीलर ने आरटीओ प्रक्रिया का दिया हवाला मामले में होरा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने आयोग के समक्ष दलील दी कि वाहन का पंजीकरण परिवहन विभाग की प्रक्रिया के अनुसार होता है। कंपनी का कहना था कि निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा कर दिया गया था और आरटीओ की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता को पंजीकरण संख्या और नंबर प्लेट उपलब्ध करा दी गई थी। आयोग बोला- सेवा में स्पष्ट कमी दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत अभिलेखों की जांच के बाद आयोग ने माना कि उपभोक्ता को समय पर पंजीयन प्रमाण-पत्र उपलब्ध न कराना सेवा में स्पष्ट कमी है। आयोग ने कंपनी को 95 हजार रुपये हर्जाना अदा करने के साथ 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को वाहन का पंजीयन प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का आदेश दिया। आयोग के इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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ई-रिक्शा की आरसी नहीं देने पर 95 हजार का जुर्माना:बस्ती में डीलर को 45 दिन में प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का आदेश
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