नई दिल्ली। आपातकाल की 51 वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाने वालों के माथे पर उस गंभीर पाप का कलंक हमेशा के लिए लगा रहेगा। उन्होंने नागरिकों से इस दौर को बार-बार याद करने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा इसलिए जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी लोकतंत्र और संविधान को कुचलने की सोच न सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला किया गया, न्यायपालिका को नियंत्रित करने की कोशिश हुई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को जेलखाना बना दिया गया था। हजारों राजनीतिक कार्यकतार्ओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तथा अनेक लोगों को अमानवीय यातनाएं सहनी पड़ीं।












