HomeHealth & Fitnessबंगाल में बढ़ी राजनीतिक तपिश, टकराव चरम पर, टीएमसी नेता पर हमला

बंगाल में बढ़ी राजनीतिक तपिश, टकराव चरम पर, टीएमसी नेता पर हमला

  • अभिषेक के बाद सांसद कल्याण बनर्जी भी बने विरोध का निशाना
  • एमएलए मदन मित्रा के आवास पर पुलिस की कार्रवाई से विवाद

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक संघर्ष अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के काफिले पर हुए हमले का विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के साथ कथित मारपीट की घटना ने राज्य की राजनीति को फिर गरमा दिया है। इसके साथ ही तृणमूल विधायक मदन मित्रा के आवास पर पुलिस की छापेमारी ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि बंगाल में सत्ता बदलने के बाद राजनीतिक टकराव का नया दौर शुरू हो चुका है।

रविवार को हुगली जिले के चंडीतला क्षेत्र में सांसद कल्याण बनर्जी एक ज्ञापन देने जा रहे थे। इसी दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया। काले झंडे दिखाए गए और नारेबाजी शुरू हो गई। हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसद के साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके सिर पर चोट पहुंचाई गई। घटना के वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

इससे ठीक एक दिन पहले सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के काफिले को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले पर अंडे और अन्य वस्तुएं फेंकी थीं। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन तृणमूल का आरोप है कि विपक्षी दलों से जुड़े लोग सुनियोजित तरीके से उसके नेताओं को निशाना बना रहे हैं।

राजनीतिक तनाव के बीच कमरहाटी से विधायक मदन मित्रा के आवास ‘उदय विला’ पर पुलिस की कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया। पुलिस ने बंद पड़े परिसर का ताला तोड़कर तलाशी ली और कई दस्तावेज जब्त किए। बताया गया कि जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता को लेकर जांच चल रही है। हालांकि तृणमूल नेताओं का दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक प्रतिशोध के बीच की रेखा लगातार धुंधली होती जा रही है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रम केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के बाद उभर रहे नए राजनीतिक समीकरणों का संकेत हैं। विपक्ष में पहुंची तृणमूल अपने नेताओं पर हो रही कार्रवाइयों को राजनीतिक बदले की भावना बता रही है, जबकि सत्ता पक्ष इन्हें कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।

फिलहाल बंगाल में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। एक के बाद एक सामने आ रही घटनाओं ने राज्य की राजनीति को संघर्ष और टकराव के नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में इन मामलों की जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि बंगाल की राजनीति संवाद की ओर बढ़ती है या फिर टकराव और तेज होता है।

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