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प्रशांत किशोर का सरकारों पर हमला, बोले- अब शिक्षा-रोजगार पर देना होगा ध्यान

पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने केंद्र और बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनाव के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि अब राजनीति केवल जाति, नारे और सत्ता तक सीमित नहीं रह सकती। सरकारों को शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता से काम करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में भी जनता इसी तरह का फैसला सुनाएगी।

मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट की जीत नहीं, बल्कि जनता की सोच में आए बदलाव का संकेत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “30 वर्ष का गढ़ 30 दिनों में ढह गया। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, पढ़ाई और रोजगार का काम करे। अगर ऐसा नहीं करेगी तो आगे भी यही हाल होगा।”

उन्होंने बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति को राज्य का नेतृत्व सौंपकर बिहार का विकास संभव नहीं है। उनका कहना था कि बिहार की जनता अब सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपेक्षा कर रही है कि राज्य को ऐसा मुख्यमंत्री मिले, जो ईमानदार, योग्य और दूरदर्शी हो तथा शिक्षा, रोजगार और समग्र विकास के लिए स्पष्ट विजन के साथ काम करे।

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो समर्थन और विश्वास मिला है, उसे वह अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनकी पहली प्राथमिकता जनता की बुनियादी समस्याओं और शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य तथा विकास से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना होगी।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नेतृत्व किसी भी समाज के व्यक्ति को दिया जाए, लेकिन वह ईमानदार, चरित्रवान और सक्षम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सामाजिक समीकरणों के आधार पर नेतृत्व तय करने के बजाय योग्य व्यक्तियों को आगे लाना समय की आवश्यकता है।

क्षेत्रीय असमानता का मुद्दा उठाते हुए प्रशांत किशोर ने केंद्र सरकार की विकास नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि गुजरात में बुलेट ट्रेन जैसी आधुनिक परियोजनाएं चलाई जा रही हैं तो उन्हें उससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिहार के गरीब और आम लोगों को कम से कम समय पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन और बेहतर रेल सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि विकास का लाभ देश के सभी राज्यों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव हारना या जीतना सामान्य बात है, लेकिन बांकीपुर का यह चुनाव केवल स्थानीय नाली-गली या सड़क की समस्याओं का चुनाव नहीं था। यह बिहार के भविष्य, नई राजनीति और व्यवस्था परिवर्तन की वैचारिक लड़ाई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो महीनों में इस बदलाव का असर बांकीपुर में विकास कार्यों और राजनीतिक माहौल दोनों में दिखाई देगा।

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि बिहार को ऐसा नेतृत्व मिले, जिसके पास साफ छवि, मजबूत चरित्र और राज्य के विकास का स्पष्ट विजन हो। उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने भाजपा को पांच वर्षों के लिए जनादेश दिया है और अब उसकी जिम्मेदारी है कि वह बिहार के हित में सक्षम और प्रभावी नेतृत्व उपलब्ध कराए।

प्रशांत किशोर ने दोहराया कि बांकीपुर उपचुनाव का जनादेश केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि बिहार में शिक्षा, रोजगार, सुशासन और विकास को केंद्र में रखकर नई राजनीति की शुरुआत का संदेश है।

 

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