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दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की गिरफ्तारी के बाद बस्ती में राजनीतिक माहौल गरमा गया। दोनों दलों के नेता और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए। रात 8 बजे तक दर्शन स्थल पर कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के समर्थकों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है। यदि विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने से रोका जाएगा तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। प्रदर्शन स्थल पर लगातार दोनों दलों के कार्यकर्ता पहुंच रहे थे, जिससे भीड़ बढ़ती जा रही थी। नेताओं ने कहा कि जब तक दोनों नेताओं को रिहा नहीं किया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। मौके पर मौजूद कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और पार्टी के झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह सतर्क रही। प्रदर्शन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा और दोनों दलों के नेता कार्यकर्ताओं के साथ धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी गिरफ्तारी के विरोध में आवाज बुलंद करते रहे।
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बस्ती में राहुल-अखिलेश की गिरफ्तारी पर प्रदर्शन:कांग्रेस-सपा कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
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