लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पॉवर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह मनमाने रवैये पर उतर आया है। प्रबंधन न तो स्थापित नियमावलियों का पालन कर रहा है और न ही शासन एवं जनप्रतिनिधियों के निर्देशों का सम्मान कर रहा है। उसका पूरा ध्यान केवल बिजली कर्मियों के उत्पीड़न पर केंद्रित दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में भीषण गर्मी के बावजूद बिजली कर्मी दिन-रात मेहनत करके निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए हुए हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी से लेकर विभिन्न जनप्रतिनिधि बिजली व्यवस्था की सराहना कर रहे हैं तथा बिजली कर्मियों के योगदान की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। आज ही लखनऊ पूर्व के माननीय विधायक श्री ओ पी श्रीवास्तव जी ने बिजली कर्मियों की प्रशंसा की है। इसके बावजूद कॉरपोरेशन प्रबंधन बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए संघर्ष समिति से संवाद स्थापित करने को भी तैयार नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के माननीय वित्त मंत्री एवं माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद 25,000 से अधिक हटाए गए संविदा कर्मियों को अब तक कार्य पर वापस नहीं लिया गया है। इसका सीधा दुष्प्रभाव बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है और उपभोक्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान हजारों बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं को स्थानांतरित किया गया, उनका वेतन रोका गया, चार्जशीटें जारी की गईं, पदोन्नतियां रोकी गईं तथा अन्य प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की गईं।
संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा तत्कालीन अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जाएं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा नियमित रूप से श्रमिक संगठनों से वार्ता करने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर पॉवर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने पिछले तीन वर्षों में संघर्ष समिति से कोई सार्थक वार्ता नहीं की है। इससे बिजली कर्मियों में गहरा असंतोष एवं निराशा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मी मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के अनुरूप उपभोक्ताओं के हित में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। किंतु इसका अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि उनके साथ मनमाने ढंग से उत्पीड़नात्मक व्यवहार किया जाए।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि उपभोक्ताओं एवं बिजली व्यवस्था के व्यापक हित में हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए, विफल साबित हो चुकी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था को समाप्त किया जाए तथा मार्च 2023 से अब तक बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जाएं।












