श्रावस्ती के नासिरगंज में शिया समुदाय का दो महीने आठ दिन (सवा दो महीने) का शोक काल (एय्याम-ए-अज़ा) 8 रबी-उल-अव्वल को सूर्यास्त के साथ संपन्न हो गया। इसके बाद आज 9 रबी-उल-अव्वल को नासिरगंज कस्बे सहित दुनियाभर में शिया समुदाय ‘ईद-ए-ज़हरा’ मना रहा है। इस अवसर पर अज़ादार काले लिबास उतारकर नए कपड़े पहनेंगे और खुशियाँ मनाएंगे। इस सवा दो महीने के दौरान अंजुमन हुसैनिया नासिरगंज के कार्यवाहक सदर वकार हैदर उर्फ जीनू की देखरेख और कुशल नेतृत्व में मोहर्रम व सफ़र के तमाम स्थानीय जुलूसों व मजलिसों का सफल आयोजन किया गया। अज़ादारी की महान परंपरा को जीवित रखते हुए अंजुमन और स्थानीय अज़ादारों ने दूर-दराज़ के धार्मिक कार्यक्रमों में भी शिरकत की। इनमें गोंडा के धर्मेई में करीब 91 किलोमीटर का सफर तय कर मजलिस व मातम में भागीदारी और बहराइच के अलीपुर में ऐतिहासिक ’18 बनी हाशिम’ जुलूस व मजलिस में शामिल होना प्रमुख रहा। इसके अतिरिक्त, 19 मोहर्रम पर नानपारा के चाँदपुरा पहुँचकर ‘जुलूस-ए-दसवाँ शहीदाने कर्बला’ में नौहाख्वानी व सीनाज़नी की गई। बहराइच के जरवल मीरगंज में 82 किलोमीटर दूर पहुँचकर पूरी रात मजलिस व मातम किया गया और इमाम सज्जाद (अ.स.) का शबीह-ए-ताबूत बरामद कराया गया। 10 सफ़र को 32 किलोमीटर दूर नानपारा स्थित इमाम बारगाह रियासत में आयोजित ‘मजलिस-ए-अज़ा याद-ए-सकीना (स.)’ और जुलूस में पुरसा पेश किया गया। 16 सफ़र को 87 किलोमीटर दूर आदमपुर पहुँचकर 24वें ‘जुलूस-ए-अज़ा व शब्बेदारी’ में रात भर अज़ादारी की गई। 6 रबी-उल-अव्वल को 30 किलोमीटर दूर नगरौर के बड़ा इमामबाड़ा से बरामद हुए ऐतिहासिक ‘जुलूस-ए-अमारी’ में भी शिरकत की गई। 20 सफ़र (चेहल्लुम) पर नासिरगंज से 32 किलोमीटर पैदल चलकर बहराइच शाही करबला पहुँची। 21 व 22 सफ़र को पास के ही चौगाई (श्रावस्ती) के चेहल्लुम के जुलूस में भी भागीदारी की गई। 8 रबी-उल-अव्वल को शोक समापन के बाद, आज 9 रबी-उल-अव्वल से घरों और इमामबाड़ों में जश्न-ए-ईद-ए-ज़हरा की महफ़िलें सजाई जा रही हैं, जहाँ मोमिनीन एक-दूसरे को मुबारकबाद दे रहे हैं।
आज 9 रबी-उल-अव्वल: ईद-ए-ज़हरा मनाएगा शिया समुदाय:नासिरगंज में वकार हैदर के नेतृत्व में मोहर्रम आयोजन सफल
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