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सुपौल: 55 पंचायतों में लगेगा सोलर प्लांट, 7154 गरीब परिवारों को मिलेगी सौर ऊर्जा

सुपौल। जिले में गरीब परिवारों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सुपौल के 7,154 बीपीएल परिवारों के घरों की छतों पर 1.1 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे। इस योजना का शुभारंभ रविवार को किया गया, जिसके साथ जिले में चरणबद्ध तरीके से कार्य शुरू होने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

पटना स्थित विद्युत भवन से आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान 1,512 करोड़ रुपये की लागत से 2.5 लाख कुटीर ज्योति श्रेणी के उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर संयंत्र लगाने के कार्य का शुभारंभ किया गया। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र की 1,278 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण भी हुआ।

सुपौल समाहरणालय के लहटन चौधरी सभागार में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, विद्युत विभाग के अभियंताओं और लाभार्थियों ने भाग लिया। योजना के पहले चरण में सुपौल के सभी 11 प्रखंडों की 55 पंचायतों का चयन किया गया है।

इन पंचायतों में जीविका दीदियों की मदद से लाभार्थियों का सर्वेक्षण और सहमति पत्र लेने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब चयनित परिवारों के घरों पर चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।

1.1 किलोवाट क्षमता वाला प्रत्येक सोलर संयंत्र प्रतिमाह लगभग 125 यूनिट तक बिजली उत्पादन करने में सक्षम होगा। इससे घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी होने के साथ बिजली बिल का बोझ भी कम होगा।

योजना के तहत सोलर पैनल की स्थापना का पूरा वित्तीय प्रबंधन केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से किया जाएगा, जबकि सुपौल में इसके क्रियान्वयन और 10 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी मेसर्स ओसवाल पम्प्स लिमिटेड को सौंपी गई है।

किशनपुर प्रखंड की राजपुर पंचायत से इसकी शुरुआत की जा रही है, जिसके बाद अन्य चयनित पंचायतों में भी काम आगे बढ़ेगा। करीब 60 हजार रुपये की अनुमानित लागत वाले प्रत्येक संयंत्र पर केंद्र सरकार 33 हजार रुपये और राज्य सरकार 10 हजार रुपये का अनुदान देगी, जबकि शेष राशि एजेंसी द्वारा वहन की जाएगी।

योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना, बिजली खर्च कम करना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। जिला प्रशासन और विद्युत विभाग समयबद्ध तरीके से इसके क्रियान्वयन की दिशा में काम कर रहे हैं।

 

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