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चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,यूपी समेत कई राज्यों को दिए सख्त निर्देश


लखनऊ । राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बेहद सख्त रुख अपनाया। अदालत ने साफ कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह क्षेत्र की पर्यावरणीय व्यवस्था और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी वजह से कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को तुरंत कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया में प्रकाशित उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई, जिनमें बताया गया था कि मध्य प्रदेश के मुरैना इलाके में बिना नंबर और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहन खुलेआम अवैध रेत ढुलाई में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो इसका मतलब है कि संबंधित अधिकारियों ने अदालत में गलत जानकारी दी है।
अदालत ने तीनों राज्यों को आदेश दिया कि अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में आधुनिक निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए। इसके तहत नदी किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, कंट्रोल सेंटर बनाए जाएंगे और लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह पूरा काम युद्ध स्तर पर किया जाए और छह महीने के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह से शुरू हो जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। जिन ट्रकों या डंपरों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हो या जिनका रजिस्ट्रेशन न हो, उन्हें तुरंत जब्त किया जाए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल वाहन मालिकों, ठेकेदारों और अन्य लोगों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने वन विभाग के कर्मचारियों पर हो रहे हमलों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई बार अवैध खनन रोकने पहुंचे वनकर्मियों पर हमला किया जाता है, जिससे उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए राज्यों को खाली पड़े वन रक्षक और फील्ड स्टाफ के पदों पर जल्द भर्ती करनी चाहिए, ताकि निगरानी और कार्रवाई मजबूत हो सके।
अदालत ने स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का मुद्दा भी उठाया। कोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं शुरू की जाएं। साथ ही उन्हें स्किल डेवलपमेंट, वृक्षारोपण, संरक्षण कार्यों और इको-टूरिज्म जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाए, ताकि लोग अवैध खनन पर निर्भर न रहें और उन्हें वैकल्पिक रोजगार मिल सके।
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य देश के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में माना जाता है। यह लगभग 5400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और यहां कई दुर्लभ तथा संकटग्रस्त जीव पाए जाते हैं। इनमें घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड क्राउन रूफ टर्टल प्रमुख हैं। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि लगातार हो रहा अवैध रेत खनन नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जीवों के प्रजनन क्षेत्र और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले 17 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुका है। तब अदालत ने कहा था कि वह इस मामले में “मूक दर्शक” बनकर नहीं बैठ सकती। अब कोर्ट ने राज्यों को स्पष्ट संदेश दिया है कि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सख्त और समन्वित कार्रवाई जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी, जिसमें अदालत राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

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