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पहाड़ों से पहली बार पहुंचे काशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में छलक पड़े ग्रामीणों के जज्बात

लखनऊ । चंदौली जिले के नौगढ़ थाना क्षेत्र के सुदूर पहाड़ी गांव पंडी के ग्रामीणों के लिए सोमवार का दिन यादगार बन गया। जीवन में पहली बार शहर देखने की इच्छा लेकर निकले इन ग्रामीणों ने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन किए, प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना की और वाराणसी के आधुनिक स्वरूप को भी करीब से देखा। यह विशेष भ्रमण मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत चंदौली पुलिस की पहल पर आयोजित किया गया।

दरअसल, 15 जून 2026 को वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक ने नौगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंडी का दौरा किया था। निरीक्षण के दौरान ग्रामीण महिलाओं से संवाद में पता चला कि गांव की अधिकांश महिलाओं ने आज तक किसी शहर का भ्रमण नहीं किया है। जब उनसे काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन की इच्छा के बारे में पूछा गया तो सभी महिलाओं ने उत्साह के साथ अपनी इच्छा व्यक्त की। इसके बाद मौके पर ही चंदौली के पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल को इन ग्रामीणों के लिए विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

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इसी क्रम में 29 जून को चंदौली पुलिस ने गांव पंडी के 40 महिलाओं और 10 पुरुषों को पुलिस बस से वाराणसी पहुंचाया। दोपहर से शाम तक चले इस भ्रमण में सभी श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, विशालाक्षी शक्तिपीठ, दुर्गाकुंड मंदिर और संकटमोचन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। यात्रा के दौरान सभी ग्रामीणों के भोजन की व्यवस्था शहर के एक वातानुकूलित रेस्तरां में की गई।धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद ग्रामीणों को वाराणसी के आधुनिक स्वरूप से भी परिचित कराया गया। उन्हें जेएचवी मॉल और कैंट क्षेत्र का भ्रमण कराया गया, जहां कई लोगों ने पहली बार एस्केलेटर, लिफ्ट और बड़े शॉपिंग मॉल को देखा। बच्चों और महिलाओं के चेहरे पर इस दौरान अलग ही उत्साह दिखाई दिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक सोच विकसित करना, उन्हें आधुनिक समाज की सुविधाओं और अवसरों से परिचित कराना तथा उनमें आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की भावना पैदा करना था, ताकि वे भी नई संभावनाओं के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।इस यात्रा में शामिल लगभग 70 वर्षीय सरस्वती देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने आज तक कभी शहर नहीं देखा था। बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद उन्हें अत्यंत संतोष और खुशी मिली। उन्होंने कहा कि मंदिर में सभी लोगों ने उनका सम्मान किया और वाराणसी के विकास को देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगा।

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46 वर्षीय दुर्गावती ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पहली बार शहर देखने का सपना पूरा हुआ और यह अनुभव उनके जीवन की सबसे यादगार स्मृतियों में शामिल हो गया।वहीं आठ वर्षीय पीयूष के लिए यह यात्रा किसी रोमांच से कम नहीं रही। उसने बताया कि बनारस आने को लेकर वह पहले से ही उत्साहित था, लेकिन जेएचवी मॉल की लिफ्ट में बैठने का अनुभव उसे सबसे अधिक पसंद आया।यह पहल केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने, उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और नए अनुभवों से परिचित कराने की एक संवेदनशील कोशिश के रूप में सामने आई।

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