बख्शी का तालाब। सोमवार को राज्यकर विभाग द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण ‘व्यापारी संवाद कार्यक्रम’ का गवाह बना। इस कार्यक्रम में लखनऊ के विभिन्न खंडों के जीएसटी उपायुक्तों और वाणिज्य कर अधिकारियों ने स्थानीय व्यापारियों से सीधा संवाद किया। इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों की जीएसटी से जुड़ी दैनिक और तकनीकी समस्याओं को सुनना तथा उनका सबसे सरल माध्यमों से मौके पर ही निस्तारण करना है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि, सरकार द्वारा व्यापारियों की सुविधा के लिए यह विशेष अभियान पूरे जून महीने में चलाया जा रहा है। 1 जून से शुरू होकर आगामी 10 जून तक चलने वाले इस दस दिवसीय सघन संवाद कार्यक्रम के तहत राज्यकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खुद फील्ड में उतरकर अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस दौरान अधिकारी न केवल दुकानदारों और सप्लायर्स की समस्याओं को सुलझाएंगे, बल्कि व्यापार को बेहतर बनाने के लिए उनके महत्वपूर्ण सुझावों को संकलित कर उत्तर प्रदेश सरकार तक भी पहुंचाएंगे।
संवाद के दौरान विभाग के आला अधिकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नए ‘जीएसटी 2.0’ की बारीकियों के बारे में व्यापारियों को जागरूक किया। खंड 14 और 16 के जीएसटी उपायुक्त वीरेन्द्र मिश्रा तथा अमरदीप वर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि इस अभियान के माध्यम से कर प्रणाली को पारदर्शी और सुलभ बनाना है।
व्यापारियों को अब अपनी समस्याओं के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं, रजिस्ट्रेशन विभाग के उपायुक्त अभिमन्यु पाठक ने एक बड़ी राहत की खबर देते हुए बताया कि विभाग ने पंजीकरण की व्यवस्था को बेहद सरल कर दिया है। अब कोई भी नया व्यापारी यदि ऑनलाइन आवेदन करता है, तो सभी दस्तावेज सही पाए जाने पर मात्र 3 वर्किंग डे (कार्य दिवसों) के भीतर उसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन स्वीकृत कर दिया जाएगा।
रिटर्न फाइलिंग उपायुक्त संजय सिंह ने नियमित रूप से टैक्स और रिटर्न भरने के फायदों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समय पर रिटर्न दाखिल करने से न केवल व्यापारियों की साख मजबूत होती है, बल्कि उन्हें व्यापार विस्तार के लिए वित्तीय संस्थाओं से मिलने वाले निश्चित लाभ भी आसानी से प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि पूरे लखनऊ में व्यापारियों की सहायता के लिए 23 खंड सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। राज्यकर अधिकारी प्रखर सिंह और सत्यजीत ने भी फील्ड स्तर पर व्यापारियों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
इस संवाद कार्यक्रम में स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बख्शी का तालाब इकाई के अध्यक्ष वेद रतन सिंह ने इस पहल की सराहना की और कार्यक्रम में अधिक से अधिक छोटे-बड़े व्यापारियों को जोड़ने का प्रयास किया। कार्यक्रम में उपस्थित सौ से अधिक व्यापारियों ने अपनी व्यावहारिक दिक्कतें अधिकारियों के सामने रखीं।
व्यापारी अतुल मिश्रा ने एक ही मालिक की दो अलग-अलग दुकानों से होने वाली बिलिंग की जटिल समस्या को उठाया और इसका सरल निस्तारण मांगा। पूर्व प्रधान योगेन्द्र सिंह ने क्षेत्र के फुटकर मौरंग, गिट्टी, बालू और डस्ट बेचने वाले छोटे दुकानदारों की बिलिंग और टैक्स विसंगतियों की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया।
इसके साथ ही, बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर रणधीर सिंह ने करदाता व्यापारियों के लिए जीएसटी पंजीकरण और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रियाओं को पूरी तरह व्यावहारिक और कागजी उलझनों से मुक्त बनाने की मांग रखी। अधिकारियों ने सभी समस्याओं को गंभीरता से नोट करते हुए जल्द से जल्द नीतिगत समाधान निकालने का भरोसा दिया।












