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ईरान में घिरे ट्रंप ने सीरिया से एक दशक बाद अपनी सेना क्यों वापस बुलाई?

दो दशक बाद अमेरिका ने 2021 में अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाया था। अब करीब 15 साल बाद सीरिया से भी अपने सभी सैनिको को बुला लिया है। यहां से अमेरिकी सैनिकों की वापसी उस वक्त हो रही है, जब ईरान के साथ ट्रंप प्रशासन युद्ध में उलझा है। वहीं तुर्की और इजरायल के बीच सीरिया में वर्चस्व की नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। असद के सत्ता से बेदखल होने के बाद रूस भी अमेरिका की अनुपस्थिति में अपने कदम मजबूत करने का प्रयास करेगा। अभी सीरिया में रूस के दो सैन्य अड्डे हैं, जबकि अमेरिका ने 16 अप्रैल को अपना आखिरी सैन्य अड्डा भी सीरिया की अंतरिम सरकार को सौंप दिया है।

2015 में पहली बार अमेरिका सेना ने सीरिया में अपने कदम रखे थे। करीब एक दशक तक आईएसआईएस से जंग लड़ी। 2024 में बशर अल असद की सत्ता के खिलाफ तख्तापलट ने सीरिया को अमेरिका के करीब ला दिया। अल कायदा से जुड़े अल-नुसरा फ्रंट के संस्थापक और आतंकी अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।

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अल-शरा के आने से बदले समीकरण

अल-जुलानी की सरकार अमेरिका की बेहद करीबी बन गई। जबकि एक समय ऐसा भी था कि अमेरिका ने अबू मोहम्मद अल-जुलानी पर एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा। बाद में न केवल इनाम हटाया, बल्कि अहमद हुसैन अल-शरा के तौर पर एक नई पहचान दिलाई। अब शरा की सरकार अमेरिका से पूछे बिना कुछ भी नहीं करती है। हाल ही में उन्होंने व्हाइट हाउस की यात्रा की। यहां उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से हुई। इससे आप अमेरिका की नजर में शरा का महत्व समझ सकते हैं।

नहीं दोहराई अफगानिस्तान वाली गलती

अफगानिस्तान में जहां अमेरिका को सत्ता की चाबी तालिबान को सौंपनी पड़ी। वहीं सीरिया में वह रणनीतिक जीत हासिल करने में सफल रहा। सैनिकों को वापसी से पहले अमेरिका ने दमिश्क में ऐसी सरकार को बैठाने में कामयाब रहा, जो उसके हितों का ख्याल रखे। यही वजह है कि अमेरिका चुपचाप और बिना टेंशन के अपने सैनिकों को दमिश्क से वापस बुला रहा है।

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अमेरिका को सीरिया की सरकार पर क्या भरोसा?

अमेरिकी दबाव के चलते इसी साल 30 जनवरी को कुर्द सेना का सीरिया की राष्ट्रीय सेना में विलय हुआ। असद सरकार में कई हिस्सों में बंटा सीरिया शरा की अगुवाई में एक ही झंडे के नीचे आ गया। यही कारण है कि अमेरिका को विश्वास हो गया कि सीरिया की नई सरकार किसी भी आतंकी खतरे से निपट सकती है। आईएसआईएस भले ही सीरिया के पूर्वी रेगिस्तान में सक्रिय हो, लेकिन उससे पनपने का मौका नहीं मिलेगा। अगर दोबारा सिर उठाने की कोशिश करता है तो सीरिया की सेना उसे कुचलने में सक्षम होगी। जरूरत पड़ने पर अमेरिका ने मदद का आश्वासन भी दे रखा है।

क्या जीत के तौर पर पेश करेंगे ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण को बड़ी जीत के तौर पेश किया। दो महीने के भीतर ईरान पर हमला कर दिया। ट्रंप को लगा कि जल्द ही तेहरान का किला ढह जाएगा और मध्यावधि चुनाव से पहले जनता के सामने इसे बड़ी जीत के तौर पर पेश कर सकेंगे। मगर यहां उनका दांव उलटा पड़ गया। चाहकर भी ट्रंप इस दलदल से निकल नहीं पा रहे हैं। यही कारण है कि अपने पहले कार्यकाल में सीरिया से दो बार सेना निकालने का प्रयास करने वाले ट्रंप दमिश्क से हो रही मौजूदा सैन्य वापसी को बड़ी जीत के तौर पर पेश कर सकते हैं।

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