HomeHealth & Fitnessदुनिया का पहला 100% हाइड्रोजन इंजन तैयार, बनेगा बिजली संकट का भगवान

दुनिया का पहला 100% हाइड्रोजन इंजन तैयार, बनेगा बिजली संकट का भगवान

नई दिल्ली। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ऐसी महाक्रांति हुई है जो दुनिया से बिजली संकट को पूरी तरह से खत्म कर सकती है। दरअसल स्पेन के बर्मेओ शहर की कंपनी वार्टसिला ने ना सिर्फ दुनिया का पहला 100% हाइड्रोजन इंजन तैयार कर लिया है बल्कि शुद्ध हाइड्रोजन ईंधन के साथ इस विशाल पावर इंजन का सफल टेस्टिंग भी कर ली है। यह इंजन बिजली बनाएगा, जिसे कि टेस्टिंग के बाद सीधे स्पेन के नेशनल पावर ग्रिड में सप्लाई भी किया गया। इन इंजन का नाम ‘वार्टसिला 31H2’ मॉडल है, जो कि दुनिया का पहला सबसे बड़ा हाइड्रोजन इंजन है। इसकी मदद से बिना बिना कोयले या प्राकृतिक गैस के भी घरों तक बिजली पहुंचाई जा सकेगी।

क्यों खास है हाइड्रोजन इंजन?
अभी तक दुनियाभर में मौजूद हाइड्रोजन इंजन नैचुरल गैस के साथ मिलाकर चलाए जाते थे।
वार्टसिला 31H2 मॉडल के चलते दूसरे किसी तरह के इंधन की जरूरत पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए स्पेन को इसलिए चुना क्योंकि वहां पहले से ही ग्रीन एनर्जी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। इस इंजन ने साबित कर दिया है कि बिना किसी प्रदूषण के भी बिजली बनाई जा सकती है।

मौसम पर निरभर्ता होगी कम
रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर में 2030 तक सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता में 4600 गीगावाट की बढ़ोत्तरी का अनुमान है लेकिन धूप और हवा हमेशा एक सी हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसकी वजह से पावर ग्रिड में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलता है। 100% हाइड्रोजन इंजन इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर देगा।

इतना ही नहीं, जब कभी धूप या हवा ज्यादा होगी तो अतिरिक्त बिजली से पानी को तोड़कर ग्रीन हाइड्रोजन बनाई जाएगी और उसे स्टोर किया जाएगा। वहीं जब मौसम साथ नहीं देगा, तो उसी ग्रीन हाइड्रोजन को ’31H2′ इंजन में जलाकर बिजली सप्लाई की जा सकेगी।

बदलेगा पूरी दुनिया
यह पहला 100% इंजन दुनिया बदलने की ताकत रखता है। सबसे पहले इससे सबसे बड़ा फायदा चौबीसों घंटे चलने वाली बड़ी फैक्ट्रियों और AI डेटा सेंटर्स को होगा। वार्टसिला के डायरेक्टर रासमस टेइर का कहना है कि इंजन की टेस्टिंग सफल रही है। अब सिर्फ जरूरत है कि सरकारें इसके इस्तेमाल को लेकर साफ पॉलिसी बनाएं और इसके विस्तार के बारे में सोचे। अगर इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो बिजली और प्रदूषण की समस्या दुनिया से गायब हो सकती है।

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