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बस्ती जिले में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे नदी और तटबंध के बीच बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में लगभग 65 परिवारों के 300 ग्रामीण प्रभावित हैं। इन ग्रामीणों को साल के चार महीने अपना घर छोड़कर तटबंध पर शरणार्थी बनकर रहना पड़ता है, जबकि आठ महीने ही सामान्य जीवन संभव हो पाता है। बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को मकानों की छतों पर जीवन बिताना पड़ता है। कमरों में पानी भर जाने से पीने के पानी और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें पूरे दिन संघर्ष करना पड़ता है। यह स्थिति हर साल दोहराई जाती है, जिससे ग्रामीणों का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। गांव के बुजुर्ग देवलाल बताते हैं कि वे सालों से यही स्थिति देखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी को स्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर नहीं बसाया जा सका है। ग्रामीण चंदू के अनुसार, बाढ़ के दिनों में जहरीले जीव-जंतुओं से परिवार को बचाना एक बड़ी चुनौती होती है। रामस्वारथ ने बताया कि जलस्तर बढ़ने पर लोग अपने मवेशियों के साथ तटबंध पर रात गुजारने को मजबूर होते हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए नाव से करीब दो किलोमीटर की यात्रा कर तटबंध तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी उनके परिवार इसी त्रासदी से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वहीं, दुबौलिया क्षेत्र के ऊजी गांव में चमरिया माता मंदिर के समीप रिंग बांध पर भी सरयू नदी की कटान लगातार जारी है, जिससे क्षेत्र के कई लोगों को नुकसान हो रहा है। स्थानीय ग्रामीण इसे लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से कटान रोकने के लिए शीघ्र कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेखपाल अजीत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो मोटर बोट सहित छह नावें लगाई हैं और जलस्तर तेजी से बढ़ने के मद्देनजर ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार के अनुसार, सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और यह खतरे के निशान 92.73 मीटर को पार कर 92.80 मीटर पर प्रवाहित हो रहा है।
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सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर:बस्ती में कई ग्रामीण हर साल विस्थापन को मजबूर
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