रिपोर्ट: सुशील शर्मा, जिला ब्यूरो चीफ, बस्ती
बस्ती। भाई-बहन के स्नेह और प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है। इसी के साथ मिलावटी खाद्य सामग्री के कारोबार को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि मिलावट की रोकथाम के लिए होने वाली कार्रवाई कई बार कागजों तक सीमित रह जाती है, जिसका फायदा उठाकर कथित मुनाफाखोर त्योहार के बाजार में मिलावटी खोवा, पनीर और खाद्य तेल से तैयार मिठाइयां खपाने की तैयारी में जुट जाते हैं।
दूध की खपत बढ़ने के साथ दूध मंडियों में भी मिलावट का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय स्तर पर सिंथेटिक पनीर और मिलावटी दूध की बिक्री को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। त्योहार के दौरान बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध, पनीर और मावा उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
खाद्य तेलों की बढ़ती मांग ने बढ़ाई चिंता
रक्षाबंधन के मौके पर मिठाइयों और पकवानों की बढ़ती मांग के कारण सरसों तेल, वनस्पति घी और रिफाइंड तेल की बिक्री भी बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटी और घटिया खाद्य तेल बाजार में खपाए जाने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर करीब 12 हजार लीटर घटिया अथवा संदिग्ध खाद्य तेल बाजार में खपाने की तैयारी की बात सामने आ रही है। हालांकि इसकी वास्तविकता की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग द्वारा जांच और नमूना परीक्षण जरूरी है।
मिलावटी मावा-पनीर से स्वास्थ्य पर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित या मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। खराब गुणवत्ता वाले दूध, मावा और पनीर से बैक्टीरियल संक्रमण, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और बदहजमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं लंबे समय तक अस्वास्थ्यकर वसा और संदिग्ध खाद्य पदार्थों का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
जांच अभियान चलाने की मांग
रक्षाबंधन को देखते हुए लोगों ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से मिठाई की दुकानों, डेयरियों, दूध मंडियों और खाद्य तेल विक्रेताओं की सघन जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि संदिग्ध मावा, पनीर, दूध, घी और खाद्य तेल के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए तथा मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
त्योहार के दौरान आम उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ रोकने के लिए सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी निगरानी और नियमित सैंपलिंग अभियान चलाने की जरूरत है।
रक्षाबंधन पर मिलावटी खाद्य सामग्री का खतरा, खोवा-पनीर से लेकर खाद्य तेल तक मुनाफाखोरों की नजर
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