पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आयोजित हो रही है। पहली बार, पाकिस्तान, किसी बड़ी कूटनीतिक पहल में कामयाब हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सभ्यता को मिटा देने की धमकी दी थी, जिसके बाद पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप से अपील की थी कि युद्ध रोकें, शांति वार्ता के लिए मंच पर आएं।
पाकिस्तान को दुनिया में अपनी छवि बदलने का मौका मिल रहा है। भारत इस जंग में न तो मध्यस्थ बन रहा है,न ही जंग के खिलाफ है। भारत का दोस्त, इजरायल है, ईरान भी है। भारत ने युद्ध के दौरान सिर्फ अपने व्यापारिक मूल्यों पर जोर दिया। भारत का ध्यान, होर्मुज स्ट्रेट से अपने विमानों की मुफ्त आवाजाही पर रहा।
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क्या विश्वगुरु बिन गया पाकिस्तान?
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना में सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं। लोग आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ को विश्वगुरु बता रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है कि प्रधानमंत्री तमिलनाडु से लेकर पश्चिम बंगाल तक चुनाव प्रचार में डूब गए हैं।
ईरान, अमेरिका और इजरायल की जंग में बोलने से बचे। वह चाहते तो युद्ध रुक सकता था। ईरान के राजदूत ने भी यह कई बार कहा कि अगर पीएम मोदी चाहें तो जंग रुक सकती है। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान की खूब तारीफ कर हे हैं।
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कहां हो रही है बातचीत?
इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत होनी है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप उन्हें पसंदीदा फील्ड मार्शल कहते हैं। इस्लामाबाद शहर को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
पाकिस्तान में 9 और 10 अप्रैल को छुट्टी घोषित की गई। सड़कें खाली हैं और सुरक्षा के लिए हजारों सैनिक तैनात किए गए हैं। ईरानी डेलिगेशन को सुरक्षा देने के लिए पाकिस्तान ने तीन फाइटर जेट भी भेजे हैं।
पाकिस्तान की इतनी तारीफ क्यों हो रही है?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फरवरी के बाद से ही फोन पर काफी मेहनत की। उन्होंने सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देशों से भी समर्थन जुटाया। अमेरिकी टीम में जेडी वेंस के अलावा ट्रंप के सलाहकार स्टीव विटकोफ और जारेड कुश्नर भी शामिल हैं। ईरान की तरफ से डेलिगेशन कम प्रोफाइल रखा गया है क्योंकि उनके कई नेता पहले ही हमलों में मारे जा चुके हैं।
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पाकिस्तान में भी हो रही है ट्रोलिंग
पाकिस्तान में लोग इस बात पर मजाक उड़ा रहे हैं कि क्या आसिम मुनीर नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले पहले सैन्य अधिकारी होंगे। कुछ पत्रकारों ने कहा कि यह पाकिस्तान के लिए दशकों का सबसे बड़ा दिन है।
भारत ने क्यों शांति वार्ता की पहल नहीं की?
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद सत्र के दौरान कहा था कि भारत, दलाल नहीं है, किसी जंग में उलझे देश की मध्यस्थता भारत नहीं करता है। इस बयान को लेकर पाकिस्तान में उनकी आलोचना हुई, भारत में भी। भारत के ईरान और इजरायल दोनों से बेहतर संबंध रहे हैं। भारत दोनों पक्षों से जंग रोकने के लिए अपील कर चुका है।
पाकिस्तान में कैसे होगी शांति वार्ता?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी भी कमजोर है। विदेशी कर्ज चुकाने का दबाव है। नई कूटनीतिक पहल से उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधर सकती है। द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वार्ता के दौरान अमेरिका और ईरान अलग-अलग कमरों में बैठेंगे। पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच संदेश ले-जाकर बात आगे बढ़ाएंगे।
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पाकिस्तान को क्या फायदा होगा?
अगर कोई ठोस शांति समझौता होता है तो पाकिस्तान को बड़ी डिप्लोमैटिक जीत मिलेगी। यह घटना दशकों में पहली बार है जब पाकिस्तान, जंग नहीं, शांति की पहल की वजह से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया है।











