बहराइच जिले में डीज़ल का संकट दूसरे दिन और गहरा गया है। अब डीज़ल के साथ-साथ पेट्रोल की किल्लत भी शुरू हो गई है। इससे किसानों और आम आदमी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर खेतों से लेकर सड़कों तक दिखाई दे रहा है। आज सुबह से पेट्रोल पंपों पर डीज़ल के लिए लंबी कतारें देखी गईं। हालांकि, डीज़ल की सीमित आपूर्ति के कारण पंप संचालकों और किसानों के बीच गहमागहमी होती रही। अधिकांश किसान बिना डीज़ल लिए ही वापस लौट गए। लोग जरीकेन और पीपा लेकर एक पंप से दूसरे पंप तक दौड़ते रहे, लेकिन उन्हें डीज़ल नहीं मिल पाया। इस समय गेहूं की मड़ाई का काम चल रहा है, जिसके लिए किसानों को डीज़ल की सख्त जरूरत है। पिछले तीन दिनों से डीज़ल न मिलने के कारण खेतों में ट्रैक्टर खड़े हो गए हैं और कंबाइन मशीनों द्वारा होने वाली मड़ाई रुक गई है। अभी तक केवल डीज़ल की किल्लत थी, लेकिन कल दोपहर से जिले के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भी खत्म हो गया। सहालग (शादी-विवाह) के मौसम में निमंत्रण में जाने वाले लोगों के दोपहिया वाहनों में पेट्रोल भरवाने के लिए जगह-जगह लंबी लाइनें लग गईं। पंपों पर पेट्रोल न मिलने पर लोगों ने गुमटियों में चोरी-छिपे बेचे जा रहे पेट्रोल को 200 रुपए प्रति लीटर तक खरीदा। आज सुबह बलवापुर चौराहे, मेटुकहा और रामगांव जैसे ग्रामीण इलाकों में भी पेट्रोल ऊंचे दामों पर बेचा गया। वर्तमान में शहर के 10 और कस्बों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कहीं-कहीं सीमित मात्रा में डीज़ल और पेट्रोल दिए जाने की अफवाहें भी उड़ती रहीं। रमपुरवा चौकी स्थित नीलकंठ पेट्रोल पंप पर जैसे ही टैंकर आया, लोगों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीण इलाकों में रामगांव राजी चौराहा और अन्य जगहों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लटक गए हैं, जिससे किसानों के साथ-साथ राहगीरों को भी भारी दिक्कत हो रही है। अधिकारियों के आपूर्ति संबंधी दावों के बावजूद पंपों पर लगी भीड़ जमीनी हकीकत बयां कर रही है। केडीसी के पास स्थित पंप मालिक वेद प्रकाश अरोड़ा ने बताया कि डीज़ल का कोटा जितना मिल रहा है उतना दिया जा रहा है। भीड़ अधिक होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने जल्दी ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई है।
बहराइच में डीजल संकट गहराया, पेट्रोल भी खत्म:सहालग में किसान और आम आदमी परेशान, पंपों पर लंबी कतारें
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