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कालानमक चावल से सिद्धार्थनगर के युवाओं को मिलेगा रोजगार:ओडीओपी योजना के तहत 40 उद्यमियों को मिलेगा मौका


सिद्धार्थनगर में कालानमक चावल को उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए सिद्धार्थनगर को 161 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस पहल से 40 नए उद्यमियों को कालानमक चावल आधारित उद्योग स्थापित करने का अवसर मिलेगा, जिससे जिले के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। शासन ने सिद्धार्थनगर के लिए कालानमक चावल को चयनित उत्पाद घोषित किया है। इसके बाद इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को संगठित करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। योजना के तहत राइस मिल इकाइयों की स्थापना, चावल की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से संबंधित कार्यों के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा प्रदान की जाएगी। चयनित लाभार्थियों को विभाग की ओर से 25 प्रतिशत तक अनुदान भी मिलेगा। इससे उद्यम स्थापित करने की लागत कम होगी और युवाओं को कारोबार शुरू करने में आसानी होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना से कालानमक चावल की मांग और उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही, स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल पाएगा। कालानमक चावल अपनी गुणवत्ता, सुगंध और विशेषता के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले से ही पहचान बना चुका है। अब इसे उद्योग के रूप में विकसित करने की पहल से जनपद की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, ओडीओपी योजना के माध्यम से कालानमक चावल आधारित उद्योगों के विस्तार से प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होगा और युवाओं का पलायन भी कम होगा। यह योजना जिले में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जनपद में इस योजना को लेकर युवाओं और किसानों के बीच उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि 40 उद्यमियों के चयन के बाद कालानमक चावल की ब्रांडिंग और विपणन को नई गति मिलेगी, जिससे सिद्धार्थनगर की पहचान और अधिक मजबूत होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी इसे जिले के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। ओडीओपी योजना के तहत मिली यह सौगात सिद्धार्थनगर को कृषि उत्पाद आधारित उद्योगों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है। कालानमक चावल अब केवल जिले की परंपरागत पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं की आजीविका और आर्थिक समृद्धि का आधार बनने की ओर अग्रसर दिखाई दे रहा है।

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