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बस्ती जिले के कप्तानगंज विकासखंड के परसपुरा गांव निवासी कुशाग्र उपाध्याय ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए वाराणसी से गंगोत्री तक लगभग 1500 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की है। यह यात्रा करीब 100 दिनों तक चली। इस कठिन यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने विशेष रूप से दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ जनचेतना फैलाने पर जोर दिया। अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कुशाग्र उपाध्याय ने बताया कि शुरुआती दिनों में 20 किलोग्राम के बैकपैक के साथ चलना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, धीरे-धीरे उन्हें लोगों का सहयोग मिलता गया, जिससे उनका हौसला बढ़ा। पहाड़ी क्षेत्रों में उन्हें भोजन और रुकने की समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यात्रा के दौरान सड़कों पर हर जगह सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और कचरा दिखाई दिया। कुशाग्र ने आमजन से अपील की कि वे प्लास्टिक का उपयोग यथासंभव कम करें और सब्जी या अन्य सामान के लिए कपड़े के झोले का प्रयोग करें। उन्होंने लोगों से यात्रा के दौरान सड़कों पर कचरा न फैलाने और हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखने की आदत विकसित करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़े बदलाव संभव हैं। कुशाग्र उपाध्याय के इस प्रेरणादायक कार्य के सम्मान में कप्तानगंज विकासखंड परिसर में उनका भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर ब्रजेश उपाध्याय, अमरनाथ तिवारी, प्रदीप तिवारी, गौरव त्रिपाठी, पिंटू सोनकर, राजेश त्रिपाठी, दिलीप पांडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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युवा ने वाराणसी से गंगोत्री तक की 1500 किमी पैदल:पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, प्लास्टिक उपयोग घटाने की अपील
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