HomeHealth & Fitnessकांग्रेस का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन,महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग 

कांग्रेस का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन,महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग 

नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए महिला आरक्षण को तुरंत 543 सीटों पर लागू करने की मांग की है। दिल्ली कांग्रेस के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने यहां महिलाओं से संवाद किया।

इस दौरान राज्यसभा सांसद जयराम रमेश, प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा, दिल्ली महिला कांग्रेस अध्यक्ष पुष्पा सिंह, कुंवर करण सिंह, सुरेंद्र कुमार, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की महिलाएं उपस्थित रहीं।

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि भाजपा की महिला विरोधी नीयत उजागर हो गई है। भाजपा ने देश की महिलाओं की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में इनका असली लक्ष्य सिर्फ राजनीतिक परिसीमन करना था। ये पूरी तरह से भाजपा का एक चुनावी प्रोपेगेंडा था, जो अब जनता को समझ आ गया है।

दीपेंद्र हुड्डा ने महिला आरक्षण बिल को तुरंत 543 सीटों में लागू कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हम सरकार को तब तक चैन की नींद सोने नहीं देंगे जब तक महिला आरक्षण देश में लागू नहीं हो जाता। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि हम भाजपा सरकार को महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी नहीं करने देंगे। इसे अब 543 सीटों पर लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस महिला आरक्षण बिल में देरी नहीं होने देंगी।

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में सरकार से सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण के पक्ष में है, तो 543 लोकसभा सीटों में एक-तिहाई यानी 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष लगातार सरकार से मांग कर रहा है कि वह सदन में विधेयक लाकर महिला आरक्षण को प्रभावी बनाए और इसमें किसी प्रकार की शर्तें न रखे। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार का पूरा समर्थन करने को तैयार है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में सरकार ही बाधा बन रही है। यह विधेयक पहले ही संसद से पारित होकर संविधान का हिस्सा बन चुका है लेकिन इसके क्रियान्वयन में देरी की जा रही है।

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