सिद्धार्थनगर के सोहना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक (पशुपालन) डॉ. सुनील सिंह ने भीषण गर्मी और लू से पशुओं को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी से पशुओं का दूध उत्पादन कम हो जाता है और वे बीमार भी पड़ सकते हैं। डॉ. सिंह ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पशुपालकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। डॉ. सिंह के अनुसार, पशुओं को दिन में कम से कम तीन से चार बार साफ और ताजा पानी पिलाना चाहिए। पानी को हमेशा छायादार जगह पर रखें ताकि वह गर्म न हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पानी में थोड़ा नमक या गुड़ मिलाना पशुओं के लिए फायदेमंद हो सकता है। आवास के संबंध में, पशुओं को हमेशा छायादार और हवादार स्थान पर बांधने की सलाह दी गई है। यदि पशुशाला की छत टीन की है, तो उस पर पुआल या घास डाल दें ताकि नीचे ठंडक बनी रहे। खलिहान या बाड़े के चारों ओर गीली बोरियां (टाट) लटकाने से भी तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। पशुओं को दिन में कम से कम दो बार, सुबह और शाम, ताजे पानी से नहलाना चाहिए। यह उनके शरीर का तापमान स्थिर रखने में मदद करता है और उन्हें लू लगने से बचाता है। खान-पान में बदलाव करते हुए गर्मी में पशुओं को हरा चारा अधिक मात्रा में देना चाहिए। चराई के लिए पशुओं को केवल सुबह जल्दी या शाम को धूप ढलने के बाद ही बाहर ले जाएं। दोपहर के समय उन्हें भारी दाना देने से बचना चाहिए। डॉ. सिंह ने लू (हीट स्ट्रोक) के लक्षणों और बचाव के बारे में भी बताया। यदि पशु मुंह खोलकर हांफ रहा हो, लार गिरा रहा हो या सुस्त दिखाई दे, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बुखार होने की स्थिति में पशु के माथे पर ठंडी पट्टी रखने की सलाह दी गई है।
‘भीषण गर्मी और लू से पशुओं में दूध उत्पादन कम’:सिद्धार्थनगर में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक बोले- अत्यधिक गर्मी से जानवरों को बचाना चाहिए
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