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चौरासी कोसी परिक्रमा बुधवार को विभिन्न जनपदों से होते हुए बस्ती जिले में प्रवेश कर सिकंदरपुर पहुंच गई। यहां रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार की सुबह यह मखौड़ा के लिए प्रस्थान करेगी, जहां मखधाम में हवन पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बस्ती जनपद के सिकंदरपुर में प्रवेश करने पर विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष एवं परिक्रमा के उपाध्यक्ष दिनेश मिश्रा, उमेश चंद्र मद्धेशिया, डॉ. दुर्गेश गुप्ता, मनोज मद्धेशिया, सुभाष भट्ट और अन्य कार्यकर्ताओं तथा संभ्रांत व्यक्तियों ने परिक्रमा का स्वागत किया। परिक्रमा का रात्रि विश्राम सिकंदरपुर स्थित एक इंटर कॉलेज में होगा। इस परिक्रमा का संचालन विश्व हिंदू परिषद हनुमान मंडल और धाम 84 कोसी परिक्रमा के संयोजक सुरेंद्र सिंह द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में लगभग सात से आठ सौ संत महात्मा और भारत के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु इस परिक्रमा में शामिल हैं। मखौड़ा धाम में स्नान और हवन पूजन के बाद, शनिवार को यह परिक्रमा अवध धाम के लिए प्रस्थान करेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चौरासी कोसी परिक्रमा 84 लाख योनियों में जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का एक सुलभ माध्यम है। यह परिक्रमा चैत्र मास की पूर्णिमा से शुरू हुई थी। इस बार 3 अप्रैल की सुबह मखौड़ा धाम स्थित मनोरमा नदी के पवित्र जल में स्नान कर साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने संकल्प के साथ परिक्रमा प्रारंभ की थी। 27 तिथियों की पैदल यात्रा के बाद, 252 किलोमीटर यानी चौरासी कोस चलकर साधु-संत और श्रद्धालु पुनः वैशाख मास की जानकी नवमी को मखौड़ा धाम में विधि-विधान पूर्वक परिक्रमा संपन्न करेंगे। मखौड़ा धाम के पुजारी सूरजदास ने बताया कि हिंदू धर्म आस्था और साधना पर आधारित है। आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं में परिक्रमा को मुक्ति का साधन बताया गया है। सामर्थ्य के अनुसार, मनुष्य 84 कोस, 14 कोस या 5 कोस की परिक्रमा देवभूमि से पूरी कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकता है। ब्रज क्षेत्र के गोवर्धन, अयोध्या के सरयू तट पर बसे 84 कोस भूभाग, चित्रकूट में कामदगिरि और दक्षिण भारत में तिरुवन्नमलई में भी अलग-अलग समय पर परिक्रमा यात्राएं की जाती हैं।
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सिकंदरपुर पहुंची चौरासी कोसी परिक्रमा:मखौड़ा धाम में होगा हवन पूजन, श्रद्धालु करेंगे रात्रि विश्राम
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