नासिक। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को सत्र न्यायालय से बड़ा झटका लगा है, जहां कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और उस पर कर्मचारियों को जबरन धर्मांतरण के लिए उकसाने का गंभीर आरोप है। दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस मामले में अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पीड़िता पर मानसिक दबाव बनाया गया और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणियां की गईं।
निदा खान फिलहाल फरार बताई जा रही है। उसने अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने उसे कोई अंतरिम सुरक्षा नहीं दी। अग्रिम जमानत याचिका पर अब 27 अप्रैल को सुनवाई होगी। इस बीच, नासिक पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कर तलाश तेज कर दी है।
इस मामले ने कॉर्पोरेट सेक्टर में आंतरिक शिकायत समिति (POSH) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, समिति में स्थानीय प्रतिनिधित्व की कमी और तकनीकी खामियों के कारण शिकायतों के निपटारे में दिक्कतें आईं।
वहीं कंपनी ने बयान जारी कर कहा है कि आरोपों में शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है और उन्हें पहले इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। फिलहाल, पुलिस की विशेष जांच टीम इस मामले से जुड़ी कई एफआईआर की जांच कर रही है, जिनमें छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे आरोप शामिल हैं।
टीसीएस नासिक केस में आरोपी निदा खान को राहत नहीं, पुलिस ने तेज की तलाश
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