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डीएम निरीक्षण में 4 शिक्षकों का वेतन कटा:असनहरा प्राथमिक विद्यालय में मिड डे मील बंद, गंदगी पर कार्रवाई


विकास खंड मिठवल के प्राथमिक विद्यालय असनहरा में डीएम शिवशरणप्पा जी.एन. के औचक निरीक्षण में शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आईं। लापरवाही, अव्यवस्था और जिम्मेदारों की अनुपस्थिति पर डीएम ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार शिक्षकों का एक-एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया और भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी जारी की। निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक गणेश कुमार मिश्रा और शिक्षा मित्र विजय प्रताप बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने दोनों का एक दिन का वेतन काटने का आदेश दिया। वहीं, मिड डे मील योजना और अन्य अभिलेखों की जांच में सहायक अध्यापक विशाल कुमार श्रीवास्तव और सहायक अध्यापक ज्योत्सना तिवारी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिस पर उनके खिलाफ भी एक दिन के वेतन कटौती की कार्रवाई की गई। विद्यालय की शैक्षिक स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। छात्र-छात्राओं की उपस्थिति काफी कम थी। इस पर जिलाधिकारी ने प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया कि अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। जांच में यह भी सामने आया कि कई छात्र निर्धारित यूनिफॉर्म में नहीं थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि विद्यालय में मिड डे मील योजना पूरी तरह बंद मिली, जिससे बच्चों को पोषणयुक्त भोजन नहीं मिल रहा था। जिलाधिकारी ने संबंधित जिम्मेदारों को तत्काल मिड डे मील संचालन नियमित करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त, विद्यालय में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं थी और परिसर में साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब पाई गई। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल पेयजल व्यवस्था बहाल करने और नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने स्पष्ट चेतावनी दी कि शैक्षिक संस्थानों में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसी खामियां दोबारा पाई गईं तो संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सके और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से पात्र बच्चों तक पहुंच सके।

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