लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम एवं कोल इंडिया लिमिटेड के मध्य प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से ताप विद्युत गृह स्थापित किए जाने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि प्रदेश में किसी भी नई ताप विद्युत परियोजना को ज्वाइंट वेंचर के बजाय पूर्णतः उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को ही सौंपा जाए, जिससे परियोजनाओं का समयबद्ध एवं किफायती क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कोल इंडिया लिमिटेड को देश में ताप विद्युत संयंत्रों की स्थापना एवं संचालन का कोई व्यावहारिक अनुभव नहीं है। इसका उदाहरण मध्य प्रदेश के अमरकंटक ताप विद्युत गृह की प्रस्तावित विस्तार परियोजना है, जिसमें कोल इंडिया के साथ ज्वाइंट वेंचर का निर्णय लिया गया था। किंतु बाद में उच्च स्तरीय तकनीकी समिति की जांच में यह प्रस्ताव अव्यावहारिक पाया गया और अंततः मध्य प्रदेश सरकार को यह निर्णय निरस्त करना पड़ा तथा परियोजना को राज्य के उत्पादन निगम को ही सौंपा गया।
संघर्ष समिति ने यह भी स्मरण कराया कि फरवरी 2023 में 2×800 मेगावाट ओबरा ‘डी’ तथा 2×800 मेगावाट अनपरा ‘ई’ परियोजनाओं को एनटीपीसी के साथ ज्वाइंट वेंचर में देने का समझौता किया गया था। किन्तु समझौते के लगभग साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद इन परियोजनाओं के निर्माण कार्य में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इससे यह स्पष्ट है कि ज्वाइंट वेंचर मॉडल परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब उत्पन्न करता है, जिससे लागत में वृद्धि होती है और अंततः इसका आर्थिक भार प्रदेश की आम जनता पर पड़ता है।
संघर्ष समिति ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अभियंता एवं कर्मचारी अत्यंत कुशल, अनुभवी एवं समर्पित हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों एवं पुरानी मशीनों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार अर्जित किए हैं। ऐसे में बाहरी संस्थाओं के साथ ज्वाइंट वेंचर का प्रस्ताव न केवल अनावश्यक बल्कि पूर्णतः अव्यावहारिक प्रतीत होता है।
संघर्ष समिति ने माननीय मुख्यमंत्री से पुनः अपील की है कि प्रदेशहित, उपभोक्ताओं के हित एवं विद्युत क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को कैबिनेट में स्वीकृति न दी जाए तथा सभी प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाएं राज्य उत्पादन निगम को ही सौंपी जाएं।












