लखनऊ। राजधानी में कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सीनियर अधिकारी लगातार थानों का निरीक्षण करते थे। यह व्यवस्था एक लम्बे समय से चली आ रही थी। पूर्व में रहे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निरीक्षण के जरिये क्षेत्रीय पुलिस कर्मियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखते थे। वहीं कमिश्नरेट लागू होने के बाद भी यह व्यवस्था पूर्व पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय और डीके ठाकुर ने लागू रखी।
वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली से प्रेरित होकर जोनो के डीसीपी और एसीपी भी लगातार थानों में जाकर रिकार्ड रूम,अपराध रजिस्टर और साफ़ सफाई की निरीक्षण किया करते थे। खामियां मिलने पर क्षेत्रीय पुलिस कर्मियों को फटकार लगाते थे। किन्तु आईपीएस एसबी शिरडकर और अमरेंद्र सिंह सेंगर की तैनाती के बाद यह व्यवस्था जैसे गायब सी हो गई।
लखनऊ कमिश्नरेट में इस व्यवस्था का प्रभाव जोनो में भी साफ़ नजर आने लगा। एक लम्बे अरसे से यह तस्वीरें गायब सी हो गई। इस बीच बड़े मंगल के दिन पूर्वी ज़ोन से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं। डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने एक ही दिन में कई थानों और वहां के रिकार्ड रूम,साफ़-सफाई और अपराध रजिस्टर को चेक किया। कमियां मिलने पर संबंधित को उसे ठीक करने के दिशा निर्देश भी दिए हैं।
आईपीएस दीक्षा शर्मा की इस पहल से लोगों में एक बार पारदर्शी न्याय की रौशनी फिर जाग उठी है। सभी महिला अधिकारी की इस पहल की जमकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं।












