श्रावस्ती जिले के जमुनहा ब्लॉक के सतरही गांव में स्थित कुंजा ताल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। लगभग 150 वर्ष पुराने इस तालाब के जल में स्नान करने से चर्म रोग ठीक होने की मान्यता है। इस विश्वास के कारण दूर-दराज से लोग यहां आते हैं। श्रद्धालु पहले तालाब में स्नान करते हैं, फिर किनारे स्थित कुंजा समय माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाते हैं। भक्तों का मानना है कि इससे शारीरिक रोगों से राहत मिलती है और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। प्रत्येक मंगलवार और रविवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिससे यह स्थान मेले जैसा प्रतीत होता है। मंदिर के पुजारी पंडित घनश्याम तिवारी के अनुसार, यह तालाब कई वर्षों पुराना है और माता की कृपा से इसका जल कभी नहीं सूखता। उनका कहना है कि श्रद्धा से आने वाले भक्तों को यहां लाभ मिलता है। स्थानीय ग्रामीण भी बताते हैं कि भीषण गर्मी में भी इस तालाब का पानी कभी नहीं सूखता, जिसे वे दैवीय शक्ति से जुड़ा मानते हैं। स्थानीय निवासी लालजी विश्वकर्मा ने बताया कि वे बचपन से देखते आ रहे हैं कि यहां स्नान करने से चर्म रोग में आराम मिलता है। गांव की शांति देवी ने भी इस बात की पुष्टि की कि यहां की मान्यता बहुत पुरानी है और लोगों का विश्वास आज भी कायम है। उन्हें कई लोगों को यहां से लाभ मिलने की जानकारी मिली है। इस तरह, कुंजा ताल श्रावस्ती में आस्था, विश्वास और परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
कुंजाताल में स्नान से चर्म रोग ठीक होने की मान्यता:श्रावस्ती में दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु, हर मंगलवार-रविवार मेला
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