Homeदेश (National)LPG की जगह PNG को अधिक महत्व क्यों दे रही सरकार?

LPG की जगह PNG को अधिक महत्व क्यों दे रही सरकार?

भारत सरकार का फोकस अधिकांश लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी में शिफ्ट करने की है। हाल ही में एक आदेश में सरकार ने कहा कि जिन इलाकों में पीएनजी की सुविधा है, वहां पीएनजी कनेक्शन नहीं लेने पर तीन महीने बाद लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की डिलीवरी बंद कर दी जाएगी। अब सवाल यह उठ रहा है कि भारत सरकार एलपीजी की जगह पीएनजी पर इतना फोकस क्यों कर रही है? यह गैस देश में कहां से आती है और क्या इसकी सप्लाई चेन में दिक्कत नहीं है। आइये समझते हैं…

पाइप्ड नेचुरल गैस में मुख्य रूप से मीथेन होती है। इसे पाइप नेटवर्क के माध्यम से घरों तक पहुंचाया जाता है। इस व्यवस्था में बार बार सिलेंडर भरवाने की जरूरत नहीं होती है। बिल का भुगतान करने पर 24 घंटे सप्लाई जारी रहती है। देशभर में पीएनजी को लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी के तौर पर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है।

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अगर एलपीजी की बात करें तो इसे तेल रिफाइनरियों से निकाला जाता है। भारत अपनी जरूरत का 60 फीसद एलपीजी आयात करता है। इसमें से 90 फीसद होर्मुज की खाड़ी के रास्ते आता है। ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी में टैंकरों की आवाजाही सामान्य नहीं है। इस कारण एलपीजी की आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ रहा है।

पीएनजी का उत्पादन देश के भीतर ही बड़े पैमाने पर होता है। वहीं बाहर से आने वाली एलएनजी से इसे तैयार किया जाता है। हर साल भारत करीब 25 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी का आयात करता है। भारत अपनी जरूरत की 50 फीसद नेचुरल गैस आयात करता है। भारत ने कतर से करीब 41 फीसद एलएनजी का आयात किया। वहीं अमेरिका से 19 फीसद एलएनजी खरीदी।

देश में असम, त्रिपुरा और कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन से नेचुरल गैस का उत्पादन होता है। सिर्फ असम और त्रिपुरा से देश की कुल गैस आपूर्ति का 13 फीसद हिस्सा आता है। भारत मुख्य रूप से कतर, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से एलएनजी का उत्पादन करता है। देशभर में 332 मिलियन से अधिक एलपीजी कनेक्शन हैं। वहीं पीएनजी के 16.2 मिलियन घरेलू कनेक्शन है।

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एलपीजी में ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण होता है। इसे तरल रूप में सिलेंडर में भरा जाता है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक एलपीजी के लिए हमारी आयात निर्भरता पीएनजी या एलएनजी की आयात निर्भरता से कहीं अधिक है। पीएनजी के मामले में हम 50 फीसद उत्पादन घरेलू स्तर पर करते हैं। इस कारण एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट करना राष्ट्र हित में है।

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