सिद्धार्थनगर में जर्जर पानी की टंकी पर हुए हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने जिले में निष्प्रयोज्य और खतरनाक भवनों को चिन्हित कर तत्काल ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सभी विभागाध्यक्षों, अधिशासी अभियंताओं और कार्यदायी संस्थाओं को जारी किया गया है। जर्जर पानी की टंकी पर चढ़ गए थे किशोर
2 मई शनिवार को नगर पालिका क्षेत्र में हुई। पांच किशोर एक जर्जर पानी की टंकी पर रील बनाने के लिए चढ़े थे। उतरते समय टंकी की सीढ़ी टूट गई, जिससे तीन लड़के नीचे गिर गए और दो लड़के ऊपर फंस गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचित किया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. और पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य की कमान संभाली। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को भी बुलाया गया, जिसके बाद फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दल मौके पर तैनात किए गए। बचाव अभियान प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। पानी की टंकी के चारों ओर दलदल और पानी भरा होने के कारण भारी मशीनों का पहुंचना कठिन था। इसके लिए तीन जेसीबी और एक पोकलैंड मशीन की सहायता से लगभग डेढ़ सौ मीटर लंबा अस्थायी रास्ता बनाया गया। प्रशासन ने लगभग डेढ़ सौ डंपर गिट्टी, ईंट के रोड़े और मिट्टी डालकर रास्ते को मजबूत किया। प्रशासनिक टीमें देर रात तक मौके पर सक्रिय रहीं। गोरखपुर से मंगाई गई हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म क्रेन का मुख्य मार्ग पर ट्रायल के दौरान सेंसर काम नहीं किया। इसके बाद लखनऊ से दूसरी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म क्रेन भेजी गई, जो बाराबंकी तक पहुंच चुकी थी। इसी बीच, प्रशासन ने ‘प्लान-बी’ के तहत एयरफोर्स की मदद लेने का निर्णय लिया। रविवार सुबह लगभग 5:20 बजे एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर द्वारा दोनों किशोरों को सुरक्षित बचा लिया गया।
एक लड़के की मौत हो गई थी इस हादसे में जुगलीपुर निवासी 12 वर्षीय बाले उर्फ सिद्धार्थ की मौत हो गई। वह मोहाना थाना क्षेत्र के जुगलीपुर गांव का निवासी था और चार दिन पहले अपने चचेरे भाई पवन के घर काशीराम आवास कॉलोनी आया था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और कक्षा पांच का छात्र था। हादसे में शास्त्रीनगर निवासी 14 वर्षीय गोलू और उरवलिया गांव निवासी 11 वर्षीय सनी भी घायल हुए। वहीं टंकी पर फंसे 16 वर्षीय कल्लू उर्फ साहबान और 15 वर्षीय पवन का घंटों चले अभियान के बाद सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
डीएम ने उपयोग में न आने वाले भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया
घटना के बाद जिलाधिकारी ने पूरे जिले में जर्जर और निष्प्रयोज्य भवनों, पानी की टंकियों, बाउंड्रीवाल और अन्य खतरनाक संरचनाओं का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने कहा है कि ऐसे ढांचे कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, इसलिए उन्हें तत्काल चिन्हित कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ध्वस्त कराया जाए। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी निष्प्रयोज्य अथवा जर्जर सरकारी संरचना में हादसा होता है तो संबंधित विभागीय अधिकारी को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। डीएम के इस आदेश के बाद अब विभिन्न विभागों में पुराने और खतरनाक भवनों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू होने की संभावना है।
सिद्धार्थनगर में उपयोग में न आने वाले भवन ध्वस्त होंगे:डीएम ने दिया आदेश, जर्जर टंकी चढ़े लड़के की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट
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