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बस्ती जनपद की गोविंद नगर शुगर मिल को फिर से चालू कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को रविवार को 318 दिन पूरे हो गए। मिल के गेट पर किसान और मजदूर अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इतने लंबे समय के बाद भी आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विकास ठाकुर ने कहा कि यह शुगर मिल उनके लिए सिर्फ एक कारखाना नहीं है। यह उनके पूर्वजों की दी हुई एक कीमती निशानी और पूरे इलाके की आर्थिक मजबूती का आधार है। उन्होंने इस धरोहर को बचाना सभी का कर्तव्य बताया। विकास ठाकुर ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि मिल को बचाने की यह लड़ाई नई नहीं है। इससे पहले 7 जनवरी 1985 को भी उनके बुजुर्गों ने इस मिल के लिए पुलिस की लाठियां सही थीं और अदालती मुकदमों का सामना किया था। उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के अच्छे भविष्य के लिए वे गोली खाने और जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और मजदूरों के अधिकारों की यह लड़ाई हर हाल में जारी रहेगी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि इलाके की खुशहाली के लिए मिल का चलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ‘मिल चलाओ-क्षेत्र बचाओ, बकाया भुगतान बाद में कराओ’ का नया नारा दिया। इसके साथ ही, उन्होंने मिल की संपत्ति पर गलत नजर रखने वालों को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि मिल को नुकसान पहुंचाने वाले दलालों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरने के दौरान सत्येंद्र बहादुर सिंह, सुनील राव, संजय सिंह, मुकेश श्रीवास्तव, अमर सिंह, शत्रुघ्न, मेवालाल, अरुण चौधरी, हरिश्चंद्र सिंह, गंगादत्त तिवारी, शिवाकांत सिंह और धीरेंद्र सिंह सहित भारी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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बस्ती में मिल गेट पर 318 दिन से प्रदर्शन जारी:श्रमिक बोले- विरासत बचाने के लिए जेल भी जाएंगे
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