रामपुर:“रेडियो अर्थात आकाशवाणी” यह शब्द सुनते ही मन के किसी कोने में बीते दिनों की मधुर यादें जाग उठती हैं,जब रेडियो श्रोताओं का हमसफर था।जो केवल यंत्र नहीं भावनाओं और संवेदनाओं का संगम था आकाशवाणी ने राष्ट्र को विशिष्ट सेवा प्रदान करते हुए गौरवशाली 90 वर्षों की यात्रा पूर्ण की है,8 जून 1936 से शुरू हुआ भारत में रेडियो प्रसारण का यह सफर गरिमा,जिम्मेदारी और इस समर्पण भाव से आज भी जारी है,आकाशवाणी के 90 वर्षों पर आकाशवाणी रामपुर की ओर से शुक्रवार 15 मई 2026 को रंगोली मंडप में एक विशेष संगीत संध्या “सुरमई सफर के 90 साल” आमंत्रित श्रोताओं के समक्ष आयोजित की गई।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त मुख्य अतिथि अतिथि रहे।विशिष्ट अतिथियों में नगर पालिका अध्यक्षा सना खानम,समाजसेवी मामून शाह खान,पूर्व डायरेक्टर मनदीप कौर सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में शास्त्रीय गायन और गजलों ने समां बांधा।इस सफर ने रेडियो और श्रोताओं के अटूट रिश्ते को पुनः जीवंत कर दिया।इस संगीत संध्या की शुरुआत में विशिष्ट अतिथियों के कर कमलों से दीप प्रज्वलित किया गया इसके बाद केंद्र के कार्यक्रम प्रमुख एवं सहायक निदेशक राजीव कुमार सक्सेना ने अतिथियों एवं समस्त आमंत्रित जनों का स्वागत किया।
इस अवसर पर सिद्धार्थ नेगी द्वारा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी गई जिसे श्रोताओं ने बहुत सराहा उन्होंने राग यमन पेश किया।संगत करने वाले कलाकार तबले पर अमिताभ शर्मा और सितार पर मुज़्तबा हुसैन रहे।इस अवसर पर आकाशवाणी रामपुर की पूर्व सहायक निदेशक श्रीमती मनदीप कौर ने भी आकाशवाणी की गरिमाशाली उपलब्धियां पर,कार्यक्रमों के निर्माण और श्रोताओं के साथ आकाशवाणी के रिश्ते पर प्रभावपूर्ण चर्चा की।
संगीत संध्या में अरुण मोहन सांख्यधर ने अपने गीत और भजनों से समां बांधा,उन्होंने सूर और मीरा आदि की विभिन्न रचनाएं प्रस्तुत की और आकाशवाणी के 90 वर्षों की यात्रा पर अपना गीत भी संगीत प्रेमी श्रोताओं के सम्मुख गाया,कार्यक्रम का आकर्षण शमी नियाजी की गाई ग़ज़लें रही उन्होंने हजरत अमीर खुसरो के कलाम को गाकर वाह वाही लूटी।इसके अलावा तहरीम निशात की गाई हुई गजलों को भी श्रोताओं की सराहना मिली।
संगीत संध्या का खास आकर्षण हितु मिश्रा के गाये लोकगीत भी रहे उन्होंने अनेक पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किये,जिसे श्रोता मंत्र मुग्ध् होकर सुनते रहे कई गीतों को मिलाकर उनके द्वारा एक रचना प्रस्तुत की गई जिसे श्रोताओं ने सराहा।आकाशवाणी का उद्देश्य कला,साहित्य,संगीत और संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन भी रहा है इसी उद्देश्य से आकाशवाणी ने लुप्त होती लोक विधाओं को जनमानस तक पहुंचाने का जो संकल्प लिया है उसी कड़ी में पीलीभीत से आए तेज राम गंगवार और साथियों ने आल्हा का संजीव प्रस्तुतीकरण किया।संगीत संध्या में जोगिन्दर,अमरनाथ,लकी वर्मा,रवि बाबू संगत कलाकार के रूप में शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उद्घोषक असीम सक्सेना एवं अपर्णा सक्सेना ने संयुक्त रूप से किया।कार्यक्रम में आकाशवाणी के श्रोता भी उपस्थित रहे जिन्होंने अपने लोकप्रिय प्रस्तुतकर्ताओं को सम्मानित भी किया।कार्यक्रम का निर्देशन कार्यक्रम प्रमुख राजीव कुमार सक्सेना एवं कार्यक्रम अधिशासी विक्रांत चौधरी ने किया,विशेष सहयोग अवधेश कुमार गौतम कार्यक्रम अधिशासी का रहा।आकाशवाणी रामपुर के स्थानीय केंद्र प्रमुख मंतोष विश्वास द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
वंदे मातरम के साथ शुरू हुआ यह कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।इस कार्यक्रम में विकास माथुर,हरि ओम,उद्देश्य सक्सेना ने सहयोग दिया।तकनीकी टीम में मयंक रस्तोगी,मुजफ्फर हुसैन सहित तकनीकी अनुभाग के अन्य सहयोगी भी शामिल थे,सभी अनुभागों के एसाईनीज का कार्यक्रमों में विशेष सहयोग रहा।इस संकल्प के साथ कि आकाशवाणी लोक सेवा प्रसारक के रूप में बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के उद्देश्य को सार्थक करते हुए सूचना,शिक्षा,ज्ञान और मनोरंजन का प्रसार सदैव करता रहेगा और श्रोताओं का साथ जिस प्रकार इन 90 वर्षों में आकाशवाणी के साथ रहा आगे भी यह सफर यूं ही जारी रहेगा,यह संगीत संध्या सफलतापूर्वक संपन्न हुई।











