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मनमोहन झा के तीखे बोल, ‘ओवैसी को छोड़िए, उनके सिपाही के बराबर भी नहीं!’

  • पुराने बयान पर पलटवार, फॉलोअर्स की तुलना से गरमाई राजनीति

गाजियाबाद। गाजियाबाद की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई जब AIMIM शहर अध्यक्ष मनमोहन झा गामा ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नासिमुद्दीन सिद्दीकी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोल दिया। एक पुराने बयान का हवाला देते हुए गामा ने न सिर्फ सियासी कटाक्ष किया, बल्कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता की तुलना कर नई बहस को जन्म दे दिया।

‘कौन ओवैसी?’ वाले बयान को बनाया निशाना

दरअसल, AIMIM नेता मनमोहन झा गामा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने अपनी प्रोफाइल और नासिमुद्दीन सिद्दीकी के सोशल मीडिया फॉलोअर्स की तुलना दिखाई। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलते दौर में जनता का समर्थन और डिजिटल लोकप्रियता भी राजनीति का बड़ा पैमाना बन चुकी है।

गामा ने दावा किया कि नासिमुद्दीन सिद्दीकी ने कभी AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर कहा था — ‘कौन ओवैसी, मैं नहीं जानता और कहां रहता है, यह भी नहीं पता।’ इसी कथित बयान को आधार बनाकर गामा ने पलटवार करते हुए कहा कि अब जनता खुद फर्क समझ रही है।

‘ओवैसी साहब देश-दुनिया में पहचाने जाते हैं’

मनमोहन झा गामा ने तीखे अंदाज में कहा, ‘ओवैसी साहब को छोड़िए, आप तो उनके सिपाही के बराबर भी नहीं हैं। जिस नेता की स्पीच लाखों लोग सुनते हों, जिन्हें देश-दुनिया जानती हो, उनके बारे में इस तरह की बातें करना जनता को स्वीकार नहीं।’

उन्होंने आगे कहा कि बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज हैं जो अपने अधिकारों और मुद्दों की राजनीति चाहते हैं। गामा के मुताबिक, ओवैसी की सभाओं में उमड़ने वाली भीड़, सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत पकड़ और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान इस बात का प्रमाण है कि वे देश के बड़े नेताओं में शुमार हो चुके हैं।

‘ओवैसी राजनीति के कोहिनूर’ — गामा

AIMIM शहर अध्यक्ष ने ओवैसी को ‘राजनीति का कोहिनूर’ बताते हुए कहा कि कुछ लोग उनकी लोकप्रियता को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज उनके भाषण सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सुने जाते हैं।

गामा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए ऐसे बयान आने वाले दिनों में और सियासी गर्मी बढ़ा सकते हैं।

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