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विक्रमजोत सीएचसी में डॉक्टरों की कमी, मरीज परेशान:एमबीबीएस डॉक्टर न होने से आयुष, दंत चिकित्सक संभाल रहे ओपीडी

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) विक्रमजोत, हर्रैया बस्ती विकास क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी और कथित अनियमितताओं के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र में तीन एमबीबीएस डॉक्टर, तीन फार्मासिस्ट और सैकड़ों कर्मचारी तैनात होने के बावजूद, मरीजों के इलाज की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। जानकारी के अनुसार, डॉ. दीपक, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जितियापुर (छावनी) में कार्यरत हैं, विक्रमजोत सीएचसी में निवास करते हैं। उन पर आरोप है कि वे यहीं बैठकर मरीजों से अनुचित शुल्क वसूलते हैं। मरीजों को बिना जांच और अल्ट्रासाउंड के नहीं छोड़ा जाता, और उन्हें एक छोटे से पर्चे पर हजारों रुपये की दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता है, जिन पर कंपनियों से भारी कमीशन मिलता है। सीएचसी विक्रमजोत में तैनात दंत चिकित्सक डॉ. शंकर पर भी मरीजों से अनुचित व्यवहार और धन उगाही का आरोप है। वे अक्सर ओपीडी से अनुपस्थित रहते हैं और मरीजों को देखने के बजाय अपनी निजी प्रैक्टिस पर अधिक ध्यान देते हैं। डॉ. शंकर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उनके पास दंत चिकित्सा के लिए आवश्यक उपकरण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने सीएमओ कार्यालय बस्ती को कई पत्र भेजे हैं, लेकिन आज तक उन्हें मेडिकल सर्जरी के लिए कोई उपकरण नहीं मिला। उनका कहना है कि ऐसे में वे अपने कमरे में बैठकर क्या करें, इसलिए वे ओपीडी में कुछ मरीजों को देख लेते हैं, जबकि दंत सहायक अब्बासी वहां मौजूद रहते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत के अधीक्षक डॉ. अतुल सिंह ने इस संबंध में बताया कि डॉ. शंकर के पास कोई विशेष कार्य नहीं है। जब कोई अन्य डॉक्टर उपलब्ध नहीं होता, तो वे ओपीडी और इमरजेंसी संभाल लेते हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, उनके रहने से अस्पताल बंद नहीं होता और काम चलता रहता है। वहीं, लैब टेक्नीशियन विक्रम से खून जांच के बारे में जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि लैब में काफी समय से रीजेंट (जांच के लिए आवश्यक रसायन) उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण खून जांच संभव नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है, लेकिन रीजेंट नहीं मिल रहे हैं।
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