गिलौला क्षेत्र के किसानों को इन दिनों डीजल लेने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा डीजल वितरण के लिए जारी नए निर्देशों के बाद किसानों को खसरा-खतौनी लेखपाल से सत्यापित कराने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती के इस अहम समय में यह व्यवस्था उनके लिए बड़ी समस्या बन गई है। नई व्यवस्था के तहत, धान की नर्सरी लगाने, गन्ने की सिंचाई या खेत की जुताई जैसे कृषि कार्यों के लिए डीजल खरीदने से पहले किसानों को अपनी भूमि संबंधी अभिलेख लेखपाल से प्रमाणित कराने होंगे। यह प्रक्रिया अब डीजल प्राप्त करने के लिए अनिवार्य कर दी गई है। ग्राम कोटमुबारकपुर निवासी मिठू लाल ने बताया कि उन्हें धान की नर्सरी लगाने के लिए खेत की जुताई करानी है, जिसके लिए ट्रैक्टर में डीजल की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब डीजल लेने से पहले खसरा-खतौनी लेखपाल से प्रमाणित कराना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। ग्राम एकघरवा निवासी किसान ओमकार नाथ शुक्ला ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि गन्ने की सिंचाई, धान की नर्सरी और खेत की जुताई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल की जरूरत पड़ती है। ऐसे में हर बार डीजल लेने के लिए लेखपाल को ढूंढना किसानों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। ग्राम माजरे निवासी ओमकार नाथ यादव ने बताया कि लेखपाल अक्सर तहसील में समय पर नहीं मिलते और उनका कोई निश्चित समय भी नहीं होता। किसानों को लगभग 15 किलोमीटर दूर तहसील जाकर घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में डीजल के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से यह निर्देश जारी किए गए हैं। जनपद के सभी किसानों को सूचित किया गया है कि वे भूमि संबंधी अभिलेख जैसे खसरा-खतौनी संबंधित लेखपाल से सत्यापित कराकर ही पेट्रोल पंप पर प्रस्तुत करें। सत्यापन में यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसान द्वारा कितनी भूमि पर गन्ना, मूंग, उड़द, सब्जी या मक्का की खेती की गई है। इसके बाद ही पेट्रोल पंप द्वारा केन, पीपे या डिब्बे में डीजल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य किसी व्यक्ति को किसी भी स्थिति में केन, पीपे या डिब्बे में डीजल नहीं दिया जाएगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खेती के मौसम को देखते हुए डीजल वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
किसानों को डीजल के लिए लेखपाल सत्यापन अनिवार्य:खसरा-खतौनी प्रमाणित कराने तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












