HomeHealth & Fitnessयूपी की बिजली व्यवस्था संकट की ओर, शीर्ष प्रबंधन पर मनमाने फैसलों...

यूपी की बिजली व्यवस्था संकट की ओर, शीर्ष प्रबंधन पर मनमाने फैसलों का आरोप

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि भीषण गर्मी के इस दौर में जब उत्तर प्रदेश में विद्युत मांग देश में सर्वाधिक स्तर पर पहुंच चुकी है, ऐसे समय में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के प्रति असहिष्णु, एकतरफा एवं मनमाना रवैया प्रदेश की बिजली व्यवस्था को गंभीर संकट की ओर धकेल रहा है।

संघर्ष समिति ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं को उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने हेतु पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया है। बिजली कर्मी कठिन परिस्थितियों में लगातार दिन-रात कार्य कर रहे हैं ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इसके बावजूद संघर्ष समिति ने गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं से संवाद तक करने को तैयार नहीं है। कर्मचारियों द्वारा बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु अनेक व्यावहारिक एवं सकारात्मक सुझाव दिए गए, लेकिन प्रबंधन उन पर चर्चा करने के बजाय उत्पीड़नात्मक रवैया अपनाए हुए है।

संघर्ष समिति ने कहा कि आगामी दिनों में तापमान और बढ़ने तथा विद्युत मांग में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पावर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन एवं अध्यक्ष तत्काल टकरावपूर्ण रवैया छोड़कर संघर्ष समिति के साथ सकारात्मक संवाद प्रारंभ करें तथा कर्मचारियों एवं अभियंताओं के साथ बैठकर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी एवं अभियंता देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। कर्मचारियों की योग्यता, अनुभव और कार्यक्षमता पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है, किंतु वर्तमान प्रबंधन ने कभी भी कर्मचारियों को विश्वास में लेने का प्रयास नहीं किया। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसे मनमाने निर्णय लागू किए गए तथा 20-25 वर्षों का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मियों को कार्य से बाहर कर दिया गया। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि उपभोक्ता आज परेशान है और उसे यह तक स्पष्ट नहीं है कि उसकी समस्या का समाधान कौन करेगा।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मचारी एवं अभियंता उपभोक्ताओं के हित में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु हमेशा सकारात्मक सहयोग देने के लिए तैयार हैं, किंतु प्रबंधन सहयोग और संवाद के स्थान पर उत्पीड़न का रास्ता अपना रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक है कि सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जाएं तथा कर्मचारियों को विश्वास में लेकर उपभोक्ताओं के व्यापक हित में कार्य किया जाए।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments