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6G: चीन ने सिर्फ रोशनी से 1.2 KM दूर भेजा डेटा, बदलेगा 6G का चेहरा

नई दिल्ली। चीन ने एक ऐसा आविष्कार किया है जो भविष्य में 6G नेटवर्क को क्रांतिकारी तरीके से बदल देगा। दरअसल चीन की साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा लेजर पावर्ड फोटोनिक इंजन बनाया है, जो सफेद रौशनी का इस्तेमाल कर पलक झपकते ही डेटा ट्रांसफर कर सकता है। इस इंजन की खासियत है कि इसे बेहद कम लागत पर सिरेमिक मटेरियल से तैयार किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी आने वाले समय में AI से लैस सुपर-फास्ट 6G वायरलेस नेटवर्क को चलाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

1.2 KM तक डेटा ट्रांसफर का रिकॉर्ड
रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक की पारंपरिक विज़िबल लाइट कम्युनिकेशन यानी कि VLC तकनीक से डेटा सिर्फ कुछ मीटर दूर तक ही ट्रांसफर हो पाता था। चीनी वैज्ञानिकों द्वारा बनाए फोटोनिक इंजन ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1.2KM तक डेटा को सफल तरीके से पहुंचा दिया।

इस रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिक झिगुओ शिया (Zhiguo Xia) के मुताबिक यह तकनीक साधारण इंटरनेट से बहुत अलग है। उनके मुताबिक इस तकनीक की मदद से बिना पायलट उड़ने वाले वाहनों, ड्रोन लॉजिस्टिक्स और कम ऊंचाई पर होने वाली हवाई यात्राओं के दौरान डेटा ट्रांसफर करने में बहुत आसानी हो सकती है।(REF.)

5G से बहुत तेज और सोचने-समझने वाला होगा 6G
6G इंटरनेट 5G से ना सिर्फ बहुत तेज होगा, बल्कि यह काम भी बहुत अलग तरह से करेगा। इस नए लाइट इंजन को स्मार्टफोन और सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटों से जोड़ा जाएगा, तो 6G बहुत तेज होने के साथ-साथ इंसानों और चीजों की सूक्ष्म हलचल को ‘देख’, ‘सुन’ और ‘सोच’ सकेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स से भी जुड़ी होगी जिससे समंदर, रेगिस्तान और ऊंचे पहाड़ों जैसे दुर्गम इलाकों में भी तेज इंटरनेट स्पीड मिलेगी।

आगे का प्लान क्या है?
रिपोर्ट्स की मानें, तो इस डिवाइस में अभी कुछ कमियों को ठीक किया जाना बाकी है। जैसे कि यह इंजन फिलहाल ज्यादातर पीली रोशनी देता है और इसमें लाल रंग की कमी है, जिसकी वजह से असली रंगों को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा फिलहाल इसकी स्पीड फाइबर ऑप्टिक केबल जितनी तेज नहीं है। वैज्ञानिक ऐसे मटेरियल पर रिसर्च कर रहे हैं जो स्पीड को बढ़ा सके। इसके अलावा एक फोकस इस बात पर भी होगा कि खराब मौसम में यह इंटरनेट तकनीक बिना रुके काम करती रहे। इसके लिए लेजर सिस्टम को रेडियो-फ़्रीक्वेंसी सिस्टम और AI तकनीक के साथ जोड़ने की भी तैयारी है।

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