- व्हाट्सऐप ग्रुप में आए कथित चालान लिंक पर क्लिक करने के बाद व्हाट्सऐप हैक होने का दावा।
- अगले दिन यूको बैंक खाते से 1.32 लाख रुपये चार ट्रांजेक्शन में निकाले गए।
- पीड़ित का कहना है कि उन्होंने किसी के साथ ओटीपी साझा नहीं किया।
शिमला। एक व्हाट्सऐप ग्रुप पर आया चालान का लिंक क्लिक करना शिमला के एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लिंक पर क्लिक करने के बाद पहले उनका व्हाट्सऐप हैक हो गया और अगले ही दिन सुबह उनके बैंक खाते से 1 लाख 32 हजार 800 रुपये निकल गए।
उनका कहना है कि उन्होंने किसी के साथ ओटीपी साझा नहीं किया और न ही बैंक से जुड़ा कोई लेनदेन किया। मामले की शिकायत साइबर सेल शिमला में दर्ज करवाई गई है, जिसकी जांच जारी है।
शिमला जिले के भोंट क्षेत्र के निवासी आशु चौहान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि घटना से एक दिन पहले वह एक व्हाट्सऐप ग्रुप में आए कथित चालान संबंधी लिंक पर क्लिक कर बैठे थे।
उनके अनुसार यह एक एपीके (APK) फाइल थी। लिंक खुलने के बाद उनका व्हाट्सऐप नंबर हैक हो गया। उन्हें उस समय इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसके बाद उनके बैंक खाते को भी निशाना बनाया जा सकता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार रविवार सुबह करीब आठ बजे उनके मोबाइल पर ओटीपी का एक संदेश आया। उन्होंने न तो उस संदेश को खोला और न ही किसी व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा किया।
कुछ ही देर बाद उन्हें पता चला कि उनके यूको बैंक खाते से डेबिट कार्ड के माध्यम से लगातार चार लेनदेन हो चुके हैं। इनमें दो बार 50-50 हजार रुपये, एक बार 30 हजार रुपये और एक बार 2,800 रुपये निकाले गए। इस तरह उनके खाते से कुल 1 लाख 32 हजार 800 रुपये निकल गए।
आशु चौहान का कहना है कि जिस मोबाइल नंबर से उनका व्हाट्सऐप जुड़ा था, उसी नंबर से उनका बैंक खाता भी लिंक था। उनका आरोप है कि व्हाट्सऐप हैक होने के बाद साइबर ठगों ने उसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई और रकम निकाल ली।
घटना का पता चलते ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने पुलिस से रकम वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साइबर सेल शिमला के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बैंक खाते से हुए लेनदेन, मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप हैक होने के दावे और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित एपीके फाइल के जरिए मोबाइल तक किस तरह पहुंच बनाई गई और उसके बाद बैंक खाते से रकम किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार लोगों को अनजान लिंक और खासकर एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचने की सलाह देते हैं।
ऐसे लिंक के जरिए मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर पहुंच सकता है, जिससे साइबर अपराधियों को फोन की जानकारी तक पहुंच बनाने का मौका मिल सकता है। इस मामले में भी पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि साइबर ठगी को किस तरीके से अंजाम दिया गया।












