ग्राम सभा केदारपुरवा में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा में गोवर्धन लीला का प्रसंग मुख्य आकर्षण रहा। कथा व्यास पंडित गिरिजा शंकर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के घमंड को चूर कर गोवर्धन पर्वत धारण करने की दिव्य लीला का वर्णन किया। पंडित गिरिजा शंकर महाराज ने बताया कि जब बृजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन की पूजा शुरू की, तो देवराज इंद्र क्रोधित हो गए। उन्होंने मूसलाधार वर्षा कर दी, जिससे बृजवासियों और गौधन पर संकट आ गया। तब बालकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक धारण कर बृजवासियों और गौधन की रक्षा की। इस लीला से इंद्र का अभिमान टूटा और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। कथा के दौरान पंडाल में “गोवर्धन महाराज की जय” और “कृष्ण कन्हैया लाल की जय” के जयकारे गूंजते रहे। महाराज जी ने अपने संदेश में कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और अहंकार का नाश निश्चित है। इस अवसर पर ग्राम क्षेत्रीय गणमान्य व्यक्ति और सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बहराइच के केदारपुरवा में गूंजा गोवर्धन लीला प्रसंग:श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक ने वर्णन किया
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