नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर लगने वाले निर्यात शुल्क में एक बार फिर संशोधन किया है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू होंगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और घरेलू उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
जारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। हालांकि, घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल ईंधन कर ढांचे में कोई सीधा परिवर्तन नहीं होगा।
सरकार ने कहा है कि नई दरें कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय औसत कीमतों को ध्यान में रखकर तय की गई हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मार्च 2026 में पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की व्यवस्था लागू की गई थी।
इससे पहले 16 मई 2026 को भी सरकार ने निर्यात शुल्क में संशोधन किया था। तब पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया था, जबकि डीजल पर शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया था। अब नई समीक्षा में इन दरों को और कम किया गया है। पिछले दो महीनों के दौरान डीजल और एटीएफ पर लगने वाले शुल्क में कई बार बदलाव किए गए हैं।
मार्च में डीजल पर शुल्क 21.50 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बाद में बढ़ाकर 55.5 रुपये तक किया गया। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसमें कटौती की गई। इसी प्रकार एटीएफ पर भी पहले बढ़ोतरी और फिर कमी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात शुल्क में यह संशोधन वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप किया गया है, ताकि घरेलू जरूरतों और निर्यात हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।












