लखनऊ। विश्वविद्यालय ने विधि शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एल-एल.बी. (3-वर्षीय और 5-वर्षीय) पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की है। यह नया नियम न केवल भविष्य के छात्रों के लिए है, बल्कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के द्वितीय सेमेस्टर में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर भी पूरी तरह लागू होगा। इस फैसले से लॉ के हजारों छात्रों को परीक्षा और मूल्यांकन के मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत मिली है।
नए नियमों के तहत अब विश्वविद्यालय ने अलग-अलग पास होने की बाध्यता को खत्म कर दिया है। पहले छात्रों को लिखित परीक्षा और इंटरनल असेसमेंट दोनों में अलग-अलग पासिंग मार्क्स लाने होते थे, जिससे कई छात्र किसी एक में कम नंबर आने के कारण अनुत्तीर्ण हो जाते थे। अब नई व्यवस्था में थ्योरी और इंटरनल दोनों के अंकों को मिलाकर कुल 40% अंक लाने पर भी छात्र को उस विषय में उत्तीर्ण घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि, छात्र को पूरे सेमेस्टर में पास होने के लिए सभी विषयों को मिलाकर न्यूनतम 45% कुल अंक हासिल करना अनिवार्य होगा।इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन पद्धति में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब विधि पाठ्यक्रमों के लिए 75% अंक लिखित मुख्य परीक्षा के लिए और 25% अंक इंटरनल असेसमेंट के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, छात्रों को बड़ी राहत देते हुए यह भी साफ किया गया है कि अब विद्यार्थियों को विषम सेमेस्टर से सम सेमेस्टर में सीधे प्रोन्नत (Promote) कर दिया जाएगा, जिससे उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित नहीं होगा।
नियमों में अचानक हुए इस बड़े संशोधन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि, प्रथम सेमेस्टर के छात्रों के परिणाम को भी इस नई नीति के अनुसार अपडेट किया जा रहा है। जिन छात्रों की मार्कशीट पुराने नियमों के तहत बनी थी, उनकी संशोधित मार्कशीट जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि, इस कदम से लॉ शिक्षा के स्तर में सुधार होगा और छात्रों पर परीक्षा का मानसिक तनाव भी कम होगा।












