बुलंदशहर/गाजियाबाद। गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में 11वीं कक्षा के छात्र सूर्या चौहान की चाकू घोंपकर हत्या के मामले में मारे गए आरोपी असद के अंतिम संस्कार को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोपी के परिजन उसका अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव महुआखेड़ा (नरसेना क्षेत्र) में करना चाहते थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। अंततः असद को गाजियाबाद के एक कब्रिस्तान में दफनाया गया।
जानकारी के अनुसार, सूर्या चौहान की हत्या के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल था। शनिवार रात पुलिस मुठभेड़ में असद की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद परिवार के लोग शव को पैतृक गांव महुआखेड़ा ले जाने की तैयारी कर रहे थे।
ग्रामीणों ने किया विरोध
जैसे ही गांव के लोगों को असद के शव को गांव में दफनाने की जानकारी मिली, उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जिस तरह की जघन्य घटना में असद का नाम सामने आया है, उसके बाद गांव में उसका अंतिम संस्कार स्वीकार्य नहीं है। विरोध बढ़ने पर परिजनों ने गांव में दफनाने का विचार छोड़ दिया।
चाचा बोले- जो किया, उसकी सजा मिल गई
असद के चाचा आबिद ने कहा कि परिवार उसके कृत्य का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि यदि कोई विवाद था तो उसे बातचीत या बड़ों की मदद से सुलझाया जा सकता था। हत्या जैसा कदम किसी भी स्थिति में उचित नहीं था।
आबिद ने कहा, “असद ने गलत रास्ता चुना। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। जो उसने किया, वह माफ करने योग्य नहीं है। ऊपर वाले ने उसे उसके कर्मों की सजा दे दी।”
20 साल पहले गांव छोड़ गया था परिवार
ग्रामीणों के अनुसार, असद के पिता नवाब करीब 20 वर्ष पहले गांव महुआखेड़ा छोड़कर परिवार के साथ गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में बस गए थे। तब से परिवार वहीं रह रहा था। हालांकि पैतृक संबंध होने के कारण परिजन गांव में ही अंतिम संस्कार करना चाहते थे।
गांव में अब भी चर्चा का विषय
सूर्या चौहान हत्याकांड और उसके बाद हुई पुलिस मुठभेड़ को लेकर गांव में चर्चाओं का दौर जारी है। घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और ग्रामीणों में अब भी गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।












