गाय को राष्ट्रीय माता या राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग एक बार फिर उठी है। मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अब्दुल कय्यूम रहमानी फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष दर्जा देने और उसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई है। फाउंडेशन के अध्यक्ष बदरे आलम ने ज्ञापन में बताया कि भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है। यहां अनेक पशुओं और जीवों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है, जिनमें गाय का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदू समाज में गाय को माता के रूप में सम्मान दिया जाता है और यह सदियों से भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से गाय को राष्ट्रीय माता अथवा राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठ रही है। यदि केंद्र सरकार इस दिशा में कोई निर्णय लेती है, तो गौवंश के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, गौ-तस्करी और गौ-हत्या जैसी घटनाओं पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी। फाउंडेशन ने यह भी उल्लेख किया कि गाय केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ी है। दूध, घी, मक्खन, दही सहित डेयरी उद्योग का एक बड़ा हिस्सा गौवंश पर आधारित है। इसके अतिरिक्त, गोबर से जैविक खाद, बायोगैस और विभिन्न पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार किए जाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा और पारंपरिक उपचार पद्धतियों में भी गाय से प्राप्त उत्पादों का उपयोग होता रहा है। ज्ञापन में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही इस मांग को ध्यान में रखते हुए गाय को राष्ट्रीय माता अथवा राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्रदान किया जाए। फाउंडेशन का मानना है कि ऐसा होने पर गौवंश संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां बन सकेंगी और गाय से जुड़े उद्योगों तथा ग्रामीण आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
गाय को राष्ट्रीय माता या पशु घोषित करने की मांग:सिद्धार्थनगर डीएम को प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
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