खेसरहा क्षेत्र के किसानों को डीजल खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तेल कंपनियों द्वारा प्लास्टिक के गैलन में डीजल की बिक्री पर रोक लगाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। धान की रोपाई का समय नजदीक होने से सिंचाई के लिए डीजल की आवश्यकता बढ़ गई है। बाजार में पीएसओ मानक के धातु कंटेनर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। किसान इनकी तलाश में दुकानों पर भटक रहे हैं, लेकिन कृषि यंत्र विक्रेताओं और अन्य दुकानों पर भी लोहे के गैलन व कंटेनरों का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। किसानों का कहना है कि प्लास्टिक के गैलनों का प्रचलन था, इसलिए अचानक नियम बदलने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। धातु के कंटेनर प्लास्टिक की तुलना में महंगे भी हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, सुरक्षा मानकों के तहत प्लास्टिक के गैलनों में डीजल देना बंद किया गया है। फिलहाल एक-दो लीटर तक डीजल दिया जा रहा है, लेकिन अधिक मात्रा के लिए धातु के कंटेनर अनिवार्य हैं। किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि बाजार में पर्याप्त संख्या में मानक धातु कंटेनर उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो धान की रोपाई और सिंचाई कार्य प्रभावित हो सकता है, जिससे आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी। जिला पूर्ति अधिकारी देवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि सुरक्षा मानकों के तहत प्लास्टिक के गैलन में डीजल देने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीजल एक ज्वलनशील पदार्थ है और प्लास्टिक कंटेनरों में इसके परिवहन से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने किसानों से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि जनपद में डीजल की कोई कमी नहीं है और सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध है। केवल सुरक्षित एवं निर्धारित मानकों वाले कंटेनरों में ही डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्लास्टिक गैलन पर रोक, किसानों को डीजल खरीदने में परेशानी:धान रोपाई के लिए धातु कंटेनर की तलाश, बाजार में कमी
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