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इनकम टैक्स एक्ट-2025 की सही समझ से संस्थाएं बेहतर अनुपालन कर सकेंगी : नितिन ओमर

कानपुर । इनकम टैक्स एक्ट-2025 में धर्मार्थ एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए लागू किए गए नए प्रावधानों की जानकारी कर पेशेवरों, ट्रस्ट प्रबंधकों और संस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नए कानून के तहत पंजीकरण, कर छूट, आय के उपयोग और अनुपालन से जुड़े नियमों को समझकर संस्थाएं बेहतर वित्तीय पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित कर सकती हैं। यह बातें शुक्रवार को कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी (केसीएएस) के सचिव सीए नितिन ओमर ने आयकर विभाग एवं केसीएएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के पंचम सत्र में कहीं।

मॉल रोड स्थित इनकम टैक्स एमएसटीयू हॉल में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता केसीएएस के अध्यक्ष सीए अखिलेश तिवारी ने की। उन्होंने स्वागत उद्बोधन में कहा कि धर्मार्थ ट्रस्ट एवं संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए आयकर कानून में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को विशेष महत्व दिया गया है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात कर विशेषज्ञ सीए गोविंद कृष्णा ने “चैरिटेबल ट्रस्ट्स एंड इंस्टीट्यूशंस अंडर इनकम टैक्स एक्ट-2025” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है और धर्मार्थ एवं धार्मिक संस्थाओं से संबंधित प्रावधानों को धारा 332 से 355 के अंतर्गत समाहित किया गया है। नए कानून में ऐसी संस्थाओं को नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन (एनपीओ) के रूप में परिभाषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि आयकर छूट प्राप्त करने के लिए अधिकांश धर्मार्थ एवं धार्मिक संस्थाओं को धारा 332 के अंतर्गत पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। नई संस्थाओं को प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन का प्रावधान दिया गया है, जिसके बाद निर्धारित अवधि में अंतिम पंजीकरण कराना होगा। आयकर आयुक्त संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा के बाद अंतिम पंजीकरण प्रदान करेंगे।

सीए गोविंद कृष्णा ने बताया कि संस्थाओं को प्राप्त आय का कम से कम 85 प्रतिशत हिस्सा धर्मार्थ या धार्मिक कार्यों में व्यय करना होगा, जबकि 15 प्रतिशत राशि करमुक्त रखी जा सकेगी। उन्होंने कॉर्पस फंड, आय के संचय, विदेश में व्यय, ऋण लेकर किए गए खर्च और व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित प्रावधानों की भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों का पालन न करने पर कर देयता उत्पन्न हो सकती है।

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