सिद्धार्थनगर के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना इटवा में रविवार को काला नमक धान की मिनी किट का वितरण किया गया। यह वितरण काला नमक परियोजना के तहत ग्राम नियावं में हुआ, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और धान की गुणवत्ता में सुधार करना है। काला नमक धान भारत का एक प्राचीन और अत्यधिक सुगंधित चावल है। यह अपनी अनूठी खुशबू, स्वाद और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, विशेषकर सिद्धार्थनगर से आने वाले इस चावल को ‘सुगंधित काले मोती’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) लखनऊ के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के फसल अनुसंधान केंद्र मसौधा के प्रभारी डॉ. सौरभ दीक्षित, इरी वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ बडौनी, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार, इं. अशोक कुमार पांडे, डॉ. शेष नारायण सिंह और डॉ. मारकंडेय सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि काला नमक की नई प्रजातियाँ किसानों के लिए आय सृजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और इनसे धान की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। डॉ. सौरभ दीक्षित ने जानकारी दी कि काला नमक के विकास के लिए विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ मिलकर लगातार काम कर रहे हैं, और नई प्रजातियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्यक्रम में रमेश बहादुर चौधरी, तिलकराम पांडे, जयदीप दुबे, राम महात्मा यादव सहित कई स्थानीय किसान भी मौजूद थे।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में काला नमक किट बांटे:किसानों को आय बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी
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