मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा में बुधवार देर रात पुलिस को कालियाचक-2 में बीडीओ कार्यालय से SIR प्रक्रिया में शामिल तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को छुड़ाना पड़ा. खबर के मुताबिक, स्थानीय लोग राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे थे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को ऑफिस में 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा.
अधिकारियों ने बताया कि बुधवार दोपहर के आसपास कुछ लोगों ने कालियाचक-2 बीडीओ ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. उनकी शिकायत थी कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम काट दिए गए थे. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा. पुलिस ने आखिरकार आधी रात के आसपास न्यायिक अधिकारियों को छुड़ाया. मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने अब हाल ही में नियुक्त पश्चिम बंगाल के एक्टिंग डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सिद्ध नाथ गुप्ता से इस घटना पर रिपोर्ट मांगी है.
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी. ऑफिस में घुसने से मना करने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया. उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पूरे BDO ऑफिस परिसर को घेर लिया.
आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि किया है कि प्रदर्शन के दौरान ऑफिस के अंदर फंसे लोगों में तीन महिला न्यायिक अधिकारी भी थीं. चुनाव आयोग ने पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के ऑफिस के एक अधिकारी ने बताया कि, इस पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है. जिला मजिस्ट्रेट और एसपी को तुरंत मौके पर पहुंचने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा कि डीजीपी से भी घटना की रिपोर्ट मांगी गई है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, न्यायिक अधिकारी अभी उन वोटरों से जुड़े मामलों की जांच कर रहे हैं जिनके नाम 28 फरवरी को जारी वोटर लिस्ट में ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (न्याय निर्णय के अधीन) के तौर पर चिन्हित किए गए थे. इस काम का मकसद यह सही-सही पता लगाना है कि इन नामों को लिस्ट में रखा जाना चाहिए या हटा दिया जाना चाहिए.
गुरुवार सुबह ओल्ड मालदा में भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन हुआ. जिन मतदाताओं के नाम SIR से बाहर थे, उन्होंने नारायणपुर बीएसएफ कैंप के पास नेशनल हाईवे 12 को ब्लॉक कर दिया. हालांकि, कल की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन आज शुरू से ही सतर्क रहा. पुलिस और सेंट्रल फोर्स की एक बड़ी टुकड़ी पहले ही मौके पर पहुंच चुकी है.
मैनुल हक नाम के एक प्रदर्शनकारी का कहना था कि, इस इलाके के 7 से 8 गांव से अल्पसंख्यक समुदाय के लोग यहां जमा हुए हैं. उनका कहना था कि, एसआईआर के बहाने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम चुन-चुनकर हटाए जा रहे हैं.
उनका कहना था कि, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले कहा था कि, जिन लोगों के माता-पिता का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में था, उनके नाम अपने आप मौजूदा लिस्ट में शामिल हो जाएंगे. अब, अचानक ‘लॉजिकल गड़बड़ियों’ का हवाला देकर इन सही वोटरों के नाम भी लिस्ट से हटा दिए गए.
मैनुल हक ने बताया कि, इन वोटरों के बाहर होने की दर लगभग 50 प्रतिशत है. उनमें से कई तो लगभग 150 साल पुरानी पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं. ऐसे में उनकी मांग है कि सभी सही वोटरों के नाम वापस जोड़े जाएं. उन्होंने यह भी बताया कि, इसके अलावा कई अयोग्य वोटरों के नाम भी लिस्ट में शामिल किए गए हैं, जिसका वे कड़ा विरोध करते हैं.










