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अलीगंज हादसे के बाद बड़ा कदम, एनओसी के बिना व्यवसायिक बिलिंग पर लगे रोक

लखनऊ। अलीगंज कोचिंग सेंटर में हुई भीषण अग्नि हादसे की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया, जिसमें 15 निर्दोष छात्रों की जान चली गई।इस दर्दनाक हादसे के मद्देनजर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में एक लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल कर बिजली कंपनियों की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं।

परिषद का आरोप है कि बिजली कंपनियां राजस्व वसूली के चक्कर में विद्युत सुरक्षा के मानकों को ताक पर रख रही हैं। घरेलू कनेक्शन पर वाणिज्यिक गतिविधियां शुरू होने पर बस बिलिंग श्रेणी बदल देते हैं, लेकिन विद्युत सुरक्षा एनओसी जैसी अनिवार्य शर्तों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा, “बिजली कंपनियों का रवैया बेहद लापरवाह है। उत्तर प्रदेश में 26 लाख 25 हजार 817 से ज्यादा वाणिज्यिक उपभोक्ता हैं। 

इनका कुल कनेक्शन भार करीब 75 लाख 88 हजार किलोवाट है। भारतीय विद्युत नियमावली 1956 की धारा 46 के तहत इन सभी को हर तीन साल में विद्युत सुरक्षा एनओसी का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। लेकिन बिजली कंपनियां इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही हैं। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में उपभोक्ता घरेलू कनेक्शन लेकर कोचिंग, दुकान, ऑफिस जैसी वाणिज्यिक गतिविधियां चला रहे हैं। बिजली कंपनियां ऐसे मामलों में बिलिंग तो वाणिज्यिक श्रेणी में कर देती हैं, लेकिन विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को दरकिनार कर दिया जाता है। 

यही लापरवाही बाद में शॉर्ट सर्किट और आगजनी जैसी दुर्घटनाओं का कारण बनती है। परिषद ने नियामक आयोग से मांग रखी है कि जब तक किसी प्रतिष्ठान के पास वैध विद्युत सुरक्षा एनओसी न हो, उसे वाणिज्यिक श्रेणी में परिवर्तित न किया जाए और न ही उसी आधार पर बिलिंग की जाए। भारतीय विद्युत नियमावली के तहत एनओसी के तीन वर्षीय नवीनीकरण का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी नए वाणिज्यिक कनेक्शनों पर अनिवार्य रूप से विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र की जांच हो। 

परिषद के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्रतिमाह औसतन 4000 नए वाणिज्यिक कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं। सिर्फ 1 जून से 23 जून 2026 के बीच झटपट पोर्टल के माध्यम से 3252 नए कनेक्शन दिए गए। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बेहद खतरनाक है। “अगर विद्युत सुरक्षा के मानकों पर सख्ती नहीं की गई तो अलीगंज जैसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाएंगी।

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