नई दिल्ली। कांग्रेस ने विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी जी राम जी अधिनियम लागू होने पर आरोप लगाया कि इस योजना में केंद्र और राज्य का खर्च का अनुपात 60-40 होने की वजह से यह गरीबों और राज्यों दोनों के लिए बोझ साबित होगी।
कांग्रेस सांसद एवं ग्रामीण विकास व पंचायती राज से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष सप्तगिरि उलका ने यहां पार्टी मुख्यालय में बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) मांग आधारित रोजगार देने वाली अधिकार आधारित योजना थी, जबकि नई योजना में राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल दिया गया है।
उलका ने कहा कि मनरेगा में केंद्र सरकार मजदूरी लागत का लगभग पूरा बजट देती थी और सामग्री लागत में 60-40 का अनुपात होता था। इससे राज्यों पर कम बोझ पड़ता था, लेकिन वीबी जी राम जी में मजदूरी और सामग्री दोनों की लागत 60-40 अनुपात में रख दी गई है। हरियाणा को 984 करोड़ रुपये के आवंटन में 40 प्रतिशत यानी 393 करोड़ रुपये खुद देने होंगे। इतने खर्च के बाद भी केवल 13.78 दिन का रोजगार मिल रहा है। यदि इसे 125 दिन करना हो तो राज्य को लगभग 5,786 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
गरीबों और राज्यों के लिए बोझ साबित होगा वीबी जी राम जी अधिनियम: कांग्रेस
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