बहराइच के उदवापुर ग्राम सभा के चमारनपुरवा गांव में दो हरे आम के पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया है। इन पेड़ों पर कच्चे आम लगे हुए थे। ग्रामीणों ने इस घटना में वन विभाग की मिलीभगत का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने देखा कि चमारनपुरवा में लगे दो बड़े आम के पेड़ गायब थे। कटे हुए पेड़ों की टहनियों पर लगे कच्चे आम जमीन पर बिखरे पड़े थे। पेड़ों को आरी से काटा गया था और उनकी लकड़ियों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर ले जाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि ये पेड़ कई दशकों पुराने थे। ये गांव में हरियाली और छाया का मुख्य स्रोत थे, जहां गर्मियों में बच्चे और बुजुर्ग आराम करते थे। ग्रामीणों ने वन विभाग पर मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग की अनुमति के बिना इतने बड़े पेड़ों को काटना संभव नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे लेकर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिस पर वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस संबंध में वन विभाग के दरोगा प्रतिक्षण वर्मा ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मामले की जांच करवा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में अवैध पेड़ कटाई की ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। शिकायत करने पर भी संबंधित अधिकारी टालमटोल करते रहते हैं और कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, एक बड़ा पेड़ प्रतिवर्ष सैकड़ों किलोग्राम ऑक्सीजन प्रदान करता है और धूल-मिट्टी को अवशोषित करता है। फलदार पेड़ पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। ऐसे में हरे पेड़ों की कटाई पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले की गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने दोषी ठेकेदार और विभागीय कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की भी अपील की है।
चमारनपुरवा में दो आम के पेड़ अवैध रूप से कटे:ग्रामीणों ने वन विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाया, जांच की मांग
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